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जीडीपी 5 साल में सबसे निचले स्तर पर पहुंची , रुपया भी 6 महीनें में सबसे कमजोर हुआ ।

जीडीपी 5 साल में सबसे निचले स्तर पर पहुंची ,  रुपया भी 6 महीनें में सबसे कमजोर हुआ ।

वित्त वर्ष 2015 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि पांच प्रतिशत तक लुढ़क गई। प्रमुख भारतीय क्षेत्रों में मंदी के प्रभाव का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वे नौकरियों को ट्रिम करना जारी रखते हैं। हालाँकि, सरकार को स्वीकार करना बाकी है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है।

पिछले कुछ हफ्तों में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक मंदी से निपटने के लिए कई उपायों की घोषणा की। वित्त वर्ष 2015 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि 5 प्रतिशत तक धीमी होने के बाद ये कदम आए हैं – 25 तिमाहियों में या छह वर्षों में सबसे कम।

हालांकि, प्रमुख भारतीय क्षेत्रों में मंदी का सामना करना पड़ रहा है, जो चक्रीय घटना से कहीं अधिक है, पूर्व भारतीय प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह सहित कई अर्थशास्त्रियों ने कहा, जो भारत के सबसे प्रमुख अर्थशास्त्रियों में से एक है।

मनमोहन सिंह ने रविवार को एक वीडियो संबोधन में कहा कि इस संकट से अर्थव्यवस्था को बाहर निकालने के लिए सरकार को सभी “समझदार आवाजों” तक पहुंचना आवश्यक है। सिंह के बयान पर टिप्पणी करते हुए, निर्मला सीतारमण ने कहा, “उन्होंने जो कहा, उस पर मेरा कोई विचार नहीं है। उन्होंने यह कहा और मैंने इसे सुना।”

सरकार और वित्त मंत्री सीतारमण – भले ही विकास की मंदी के बारे में पर्याप्त चिंताजनक संकेत हैं – अभी तक यह स्वीकार नहीं किया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था एक परेशान अवधि से गुजर रही है।

30 अगस्त को एक संवाददाता सम्मेलन में, एक रिपोर्टर ने सीतारमण को यह बताने के लिए कहा कि वित्त मंत्रालय ने बहु-क्षेत्र के संकट, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल क्षेत्र से निपटने की योजना कैसे बनाई है। कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं थी।

1 सितंबर को, चेन्नई में एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस में, वित्त मंत्री का जवाब अलग नहीं था।

जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या आर्थिक मंदी है, तो वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार बीमार क्षेत्रों के साथ परामर्श कर रही है और स्वीकार करने से इनकार कर दिया है कि देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है।

भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पिछले स्तर से कमजोर होकर 6 महीने के निचले स्तर पर आ गया है। 70.79 के पिछले क्लोजर की तुलना में, अब तक दिन के दौरान, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 71.02 से 71.40 के बीच कारोबार करता था, जो 71.39 पर बंद हुआ था। वैश्विक जोखिम-रहित भावना को दर्शाते हुए, दुनिया भर के शेयर बाजारों में आज चीन-अमेरिका व्यापार युद्ध के बारे में आशंका के रूप में मंदी आई, हांगकांग में विरोध प्रदर्शन और अर्जेंटीना की पेसो मुद्रा में एक दुर्घटना ने निवेशकों को बांड, सोना, और येन जैसे सुरक्षित बंदरगाह पर पहुंचा दिया।

2014 से अब तक PM नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे पर खर्च हुए 2,021 करोड़, जानें मनमोहन सिंह के वक्त कितना?

नई दिल्ली: 

मोदी सरकार में प्रधानमंत्री के विदेशी दौरों पर हुए खर्च का ब्योरा सामने आ गया है. जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं यानी 2014 से अब तक पीएम मोदी के विदेश दौरे पर करीब 2 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. सरकार ने संसद में जो सूचना मुहैया कराई है, उसके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जून 2014 से विदेश यात्रा के दौरान चार्टर्ड उड़ानों, विमानों के रखरखाव और हॉटलाइन सुविधाओं पर कुल 2,021 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं.

राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री वी के सिंह ने यह जानकारी दी. उन्होंने राज्यसभा में जवाब के तहत साल 2014 और 2018 के बीच प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किए गये विदेशी दौरों की भी जानकारी दी. उन्होंने उन टॉप 10 देशों की भी जानकारी दी, जहां से भारत को अधिकतम प्रत्यक्ष विदेशी निवेश या एफडीआई आमद प्राप्त हुआ है.

मोदी सरकार में मंत्री वीके सिंह ने कहा कि 2014 में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश 30,930.5 मिलियन अमरीकी डॉलर से बढ़कर 2017 में 43478.27 मिलियन अमरीकी डॉलर हो गया.

केंद्रीय मंत्री द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, यूपीए-2 के दौरान 2009-10 से 2013-14 तक मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं के दौरान चार्टर्ड उड़ानों, विमानों के रखरखाव और हॉटलाइन सुविधाओं पर 1,346 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे.

केंद्रीय  मंत्री वीके सिंह ने मनमोहन सिंह के आधिकारिक विदेश दौरों से संबंधित सवालों के जवाब में यह जानकारी दी, जिसमें पूछा गया कि आखिर 2009 से 2014 तक मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री के रूप में कितने खर्च हुए और 2014 के बाद से पीएम मोदी के विदेश दौरों में कितने खर्च हुए.

आंकड़ों के मुताबिक, 15 जून 2014 और 3 दिसंबर 2018 की अवधि के दौरान प्रधानमंत्री के विमान के रखरखाव पर कुल 1,583.18 करोड़ रुपये और चार्टर्ड विमानों पर 429.25 करोड़ रुपये खर्च किए गए. वहीं, हॉटलाइन सुविधाओं पर 9.11 करोड़ रु खर्च हुए. बता दें कि वीके सिंह द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण में 2017-18 और 2018-19 में पीएम मोदी की विदेश यात्राओं के दौरान हॉटलाइन सुविधाओं पर खर्च शामिल नहीं है.

आंकड़ों के मुताबिक, 2014-15 में विदेशी दौरों के लिए चार्टर्ड विमानों पर लागत रु 93.76 करोड़ थी, जबकि 2015-16 में यह 117.89 करोड़ रु हो गया. वहीं 2016-17 में 76.27 करोड़ और 2017-18 में 99.32 करोड़ रुपये हो गया. दरअसल, मई 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद से पीएम मोदी ने 48 विदेश यात्राओं में 55 से अधिक देशों का दौरा किया. उन्होंने कुछ देशों में कई दौरे किए.

सेंसेक्स 212 अंक चढ़कर 37930 पर, शेयर बाजार की मजबूत शुरुआत

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। शुक्रवार के सत्र में भारतीय शेयर बाजार की बढ़त के साथ शुरुआत हुई है। करीब 9.45 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का इंडेक्स सेंसेक्स 212 अंक चढ़कर 37930 के स्तर पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का इंडेक्स निफ्टी 79 अंक की तेजी के साथ 11448 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप इंडेक्स में 1.19 फीसद और स्मॉलकैप में 1.29 फीसद की बढ़त देखने को मिल रही है।

वैश्विक बाजार का हाल

अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार की आशंका कम होने के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़त देखने को मिल रही है। जापान का निक्केई 0.92 फीसद की तेजी के साथ 23032 के स्तर पर, चीन का शांघाई 0.13 फीसद की गिरावट के साथ 2683 के स्तर पर, हैंगसैंग 0.81 फीसद की बढ़त के साथ 27232 के स्तर पर और ताइवान का कोस्पी 1.26 फीसद की तेजी के साथ 2315 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं, बीते सत्र में अमेरिकी बाजार तेजी के साथ कारोबार कर बंद हुआ है। प्रमुख सूचकांक डाओ जोंस 0.57 फीसद की बढ़त के साथ 26145 के स्तर पर, एसएंडपी500 0.53 फीसद की बढ़त के साथ 2904 के स्तर पर और नैस्डैक 0.75 फीसद की तेजी के साथ 8013 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ है।

रियल्टी शेयर्स में खरीदारी

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आईटी को छोड़ सभी सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा खरीदारी रियल्टी शेयर्स (2.41 फीसद) में देखने को मिल रही है। बैंक (0.86 फीसद), ऑटो (0.88 फीसद), फाइनेंशियल सर्विस (0.99 फीसद), एफएमसीजी (0.26 फीसद), मेटल (1.70 फीसद), फार्मा (1.62 फीसद), पीएसयू बैंक (1.71 फीसद) और प्राइवेट बैंक (0.82 फीसद) की तेजी देखने को मिल रही है।

हिंदपेट्रो टॉप गेनर

निफ्टी में शुमार दिग्गज शेयर्स की बात करें तो 40 हरे निशान और 10 गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा तेजी हिंदपेट्रो, इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस, बीपीसीएल, पावरग्रिड और आईओसी के शेयर्स में है। वहीं, गिरावट एचसीएलटेक, टेक महिंद्रा, इंफोसिस, भारती एयरटेल और टीसीएस के शेयर्स में है।

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 72.88 के नए निम्नतम स्तर पर पहुंचा

आज भी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में गिरावट देखी गई. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 72.88 के नए निम्नतम स्तर पर पहुंचा.

नई दिल्ली: 

अंतर बैंकिंग मुद्रा बाजार में बुधवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया गिरकर 72.91 रुपये प्रति डॉलर के सर्वकालिक निम्न स्तर पर आ गया. कच्चे तेल के ऊंचे दाम और विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी से रुपया शुरुआती कारोबार में 22 पैसे गिरा.  मुद्रा डीलरों ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार मोर्चे पर तनाव बढ़ने की आशंका और कच्चे तेल के दाम में तेजी के बाद बैंकों और आयातकों की ओर से अमेरिकी मुद्रा की मांग आने से रुपये पर दबाव रहा। इसके अलावा निरंतर विदेशी पूंजी निकासी से भी घरेलू मुद्रा में दबाव देखा गया.

COMMENT

मंगलवार के कारोबारी दिन में रुपया डालर के मुकाबले 24 पैसे टूटकर 72.69 रुपये प्रति डॉलर के निम्न स्तर पर बंद हुआ था. ब्रेंट कच्चा तेल 0.35 प्रतिशत बढ़कर 79.34 रुपये प्रति बैरल हो गया. मंगलवार को इसमें 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी रही. इस बीच, बंबई शेयर बाजार सेंसेक्स सूचकांक आज शुरुआती कारोबार में 133.29 अंक यानी 0.35 प्रतिशत चढ़कर 37,546.42 अंक पर पहुंच गया.

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