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भारत सरकार में बैठे महामूर्ख मन्त्रियों एवं भारत के धर्मान्ध,अपाहिज इन्जीनियरों तुम्हे शर्म नहीं आती

भारत सरकार में बैठे महामूर्ख मन्त्रियों एवं भारत के धर्मान्ध, अपाहिज इन्जीनियरों तुम्हे शर्म नहीं आती???
तुमने ही विधिवत पूजापाठ, कर्मकाण्ड,मुहुर्त देखकर चन्द्रयान को रवाना किया था रिजल्ट सारी दुनिया के सामने है।
अभी चन्द्रयान को असफल हुए कुछ दिन ही हुए थे कि राफेल पर नारियल,नीबूं की नौटंकी शुरू???
 बता दे क रक्षा  मंत्री राजनाथ सिंह न राफेल पर ओम लखकर कलावा बांधा और उस पर गंगा जल छटकार विधि विधान से पूजा की । इस दौरान उन्होंने राफेल पर नारियल रखा और पहय के नीचे नींब रखा गया।
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस ने इतना दिखावा नहीं किया था जब उस समय सरकार बोफोर्स गन जैसा हथियार लेकर आई.
दरअसल, खड़गे ने बुधवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने इतना दिखावा नहीं किया था जब उस समय सरकार बोफोर्स गन जैसा हथियार लेकर आई. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को करीब 30 मिनट कर राफेल में उड़ान भरने से पहले उसकी शस्त्र पूजा की. उन्होंने राफेल पर ‘ऊं’ लिखा और रक्षा सूत्र भी विमान पर बांधा था.

सीरिया में तुर्की का सैन्य अभियान: हमले के रूप में दर्जनों मारे गए

गुरुवार को, तुर्की सैनिकों ने रास अल-ऐन और ताल अब्याद के सीमावर्ती कस्बों को आंशिक रूप से घेर लिया।

यह कदम संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा घोषित किए जाने के बाद यह क्षेत्र से अपने सैनिकों को वापस ले रहा था, सीरिया के डेमोक्रेटिक फोर्सेस (एसडीएफ) को छोड़कर, इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवेंट (आईएसआईएल या आईएसआईएस) सशस्त्र समूह के खिलाफ लड़ाई में उसका मुख्य सहयोगी था, बिना अमेरिकी सैन्य समर्थन। सीरियाई सीमावर्ती कस्बों में तुर्की सेना और एसडीएफ के बीच भारी संघर्ष चल रहा है। कुर्द पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स (YPG) के नेतृत्व में SDF ने तुर्की के हवाई हमलों से बचाने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगियों से “नो-फ्लाई ज़ोन” की अपील की है। तुर्की वाईपीजी को एक “आतंकवादी” समूह मानता है

तुर्की के पूर्वोत्तर सीरिया में दो मुख्य लक्ष्य हैं: कुर्द वाईपीजी मिलिशिया को चलाना, जो अपनी सीमा से दूर एक सुरक्षा खतरे को दूर करता है, और सीरिया के अंदर एक जगह बनाने के लिए जहां तुर्की में वर्तमान में बंधक बनाए गए 2 मिलियन सीरियाई शरणार्थियों को बसाया जा सकता है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका को सीरिया क्षेत्र में 20 मील (32 किमी) तक फैले एक “सुरक्षित क्षेत्र” की स्थापना करने के लिए प्रेरित कर रहा था, लेकिन बार-बार चेतावनी दी गई कि यह वाशिंगटन पर अपने पैर खींचने का आरोप लगाने के बाद एकतरफा सैन्य कार्रवाई कर सकता है। राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन ने हाल ही में सीरिया में और भी गहरे धकेलने की बात की है, जो रक्का और दीर ​​अल-ज़ोर के शहरों के प्रस्तावित “सुरक्षित क्षेत्र” क्षेत्र से परे है, ताकि सीरिया में और अधिक शरणार्थियों को वापस जाने की अनुमति मिल सके।

तुर्की के पश्चिमी सहयोगियों की ओर से 2 मिलियन सीरियाई लोगों को बसाने की योजना के लिए कोई सार्वजनिक समर्थन नहीं किया गया है – जो कि वर्तमान में होस्ट किए गए शरणार्थियों के आधे से अधिक उत्तर पूर्व सीरिया में है।मुख्य पश्चिमी चिंताएं यह हैं कि सुन्नी अरब सीरिया के बड़े पैमाने पर कुर्द पूर्वोत्तर में बाढ़ से क्षेत्र की जनसांख्यिकी बदल जाएगी। सीरिया संकट के लिए संयुक्त राष्ट्र के क्षेत्रीय समन्वयक ने कहा कि सभी पक्षों को नागरिकों के बड़े विस्थापन से बचना चाहिए अगर तुर्की ने हमला किया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तुर्की और कुर्द के बीच एक समझौते की मध्यस्थता करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर सीरिया में तुर्की के आक्रमण के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए उपलब्ध तीन विकल्पों में से एक है। “हमारे पास तीन विकल्पों में से एक है: हजारों सैनिकों को भेजें और मिलिट्री जीतें, तुर्की को आर्थिक रूप से और प्रतिबंधों के साथ मारा, या तुर्की और कुर्दों के बीच एक समझौते पर मध्यस्थता करें!” अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस योजना को “शायद सबसे अजीब विचार जो मैंने कभी सुना है” के रूप में वर्णित किया।

सीरिया में नागरिकों के खिलाफ ‘अमानवीय’ काम करने पर अमेरिका तुर्की को दंडित कर सकता है स्टेट डिपार्टमेंट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अगर तुर्की किसी भी तरह के “अमानवीय और असम्मानजनक” कदम उठाता है, तो वह तुर्की के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करेगा।

भारत सरकार तक न्यायिक एवं आर्थिक दृष्टि से मौर्य काल बहुमुखी प्रगति का युग।

दिनांक 08 अक्टूबर 2019 को कुतुबमीनार के पास स्थित अशोका मिशन, मेहरौली, दिल्ली में सम्राट अशोक क्लब, शाखा दिल्ली – एन सी आर द्वारा 2281वें धम्म विजय दिवस समारोह का आयोजन किया गया, जिसका विषय बिन्दु था न्यायिक एवं अर्थिक व्यवस्था का राष्ट्र पर प्रभाव

 

कार्यक्रम को देखने व सुनने के लिए 4000 से अधिक संख्या में लोग उपस्थित हुए। कार्यक्रम में सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ समाजसेवी, विद्वान, शिक्षाविद, पत्रकार, लेखक आदि बड़ी हस्तियां उपस्थित थी।

 

कार्यक्रम का आरंभ भगवान बुद्ध के समक्ष दीप प्रज्वलन, ध्वजारोहण, राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह की पूजा-अर्चना, त्रिसरण और पंचशील के पाठ से हुआ। सम्राट अशोक क्लब, शाखा दिल्ली-एन सी आर के अध्यक्ष राजेश कुमार मौर्य जी ने सभी अथितियों का स्वागत-अभिनंदन किया तथा कार्यकर्ताओं ने अतिथियों का सम्मान स्मृति चिन्ह भेंट देकर किया।

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पी. सी. मौर्य जी, अतिरिक्त निदेशक, एस.एफ.आई.ओ, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय, भारत सरकार ने अपने संबोधन में बताया कि न्यायिक एवं आर्थिक दृष्टिकोण से मौर्य काल बहुमुखी प्रगति का युग था। इस काल में न केवल कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई बल्कि उद्योग, पशुपालन, व्यवसाय, खनिज उत्खनन एवं व्यापार में भी बहुत प्रगति हुई। उन्होंने मौर्य कालीन कर व्यवस्था पर प्रकाश डाला और कहा कि नई भूमि पर कृषि के विकास को प्रोत्साहन दिया गया ताकि राजस्व में वृद्धि हो।

 

सम्राट अशोक क्लब के राष्ट्रीय प्रवक्ता सच्चिदानन्द जी ने कार्यकर्ताओं को राष्ट्र हित कार्यों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया तथा कहा कि संविधान सर्वोपरि है। समाज और राष्ट्र की भलाई संविधान का पूर्ण से अनुसरण करने में है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान सम्राट अशोक महान के शिलालेखों पर आधारित है। जो लोग कहते है कि भारतीय संविधान विदेशों से लिया गया है वे गलतफहमी के शिकार है। सम्राट अशोक महान के काल में ये सारी बातें विदेशों में गई और आजादी के बाद फिर वहां से भारत में वापस आई। आज के भारत की न्याय और अर्थव्यवस्था का मूल ढ़ाचा सम्राट अशोक महान की देन है किन्तु इसके सही क्रियान्वयन नही होने से आज भारत विश्व के पिछले पायदान पर खडा है। यदि भारत को पुनः विश्व का मुखिया बनाना है तो तथागत गौतम बुद्ध और सम्राट अशोक महान के सिद्धान्तों को पूरी तरह लागू करके ही बन सकता है।

 

 समारोह में अशोका मिशन के अध्यक्ष वेन. लामा लोबसांग जी, शत्रुधन सिंह शाक्य जी, मा. आर. डी. कुशवाहा जी, अधिवक्ता मा. अजय विक्रम सिंह जी, डा. अम्बिका जी ने न्यायिक एवं अर्थिक व्यवस्था पर अपने विचार रखें।

 

सिने-तारिका रिया दिप्सी मौर्य जी, श्रोताओं के आकर्षण का केन्द्र रही। वे मुम्बई से अशोका मिशन पहुंची थी। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध और सम्राट अशोक महान दोनों ही राष्ट्र और व्यक्ति के जीवन का आधार है। प्रत्येक व्यक्ति को उनके प्रति पूर्ण श्रद्धा रखनी चाहिए।

 

सम्राट अशोक क्लब के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ ने भारतीयता एवं राष्ट्रीयता पर आधारित गीत, संगीत और नाटक का आयोजन किया गया।

 

आई. टी. और वेबकास्टिंग टीम ने कार्यक्रम की वेबकास्टिंग यू-टयूब एवं फेसबुक पर किया, जिसके माध्यम से सदूर बैठे लोगों ने भी कार्यक्रम का आनन्द लिया।

 

समारोह का समापन कार्यकर्ताओं द्वारा मंच पर ध्वज गीत साथ हुआ।

बिहार में बाढ़ का कहर, बाढ़ के कारण मौत का आंकड़ा अब तक 56 पहुँचा

बिहार में बाढ़ का कहर, बाढ़ के कारण मौत का आंकड़ा अब तक 56 पहुँचा।

बुधवार को India Meteorological Department ने गुरुवार और शुक्रवार को पटना सहित बिहार में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की चेतावनी जारी की।

पटना सहित बिहार के कई क्षेत्रों के लिए 3 और 4 अक्टूबर को अलर्ट जारी किया गया है क्योंकि इन क्षेत्रों में भारी वर्षा होने की संभावना है। 27 से 30 सितंबर के बीच होने वाली अथक बारिश और जल प्रलय ने राज्य के कुछ हिस्सों को बुरी हालत में छोड़ दिया है और मरने वालों की संख्या 56 हो गई है।

सोमवार से बहाली के काम पूरे जोरों पर हैं और सरकारी राहतकर्मियों की मेहनत पर पानी फिर गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पटना, वैशाली और खगड़िया जिलों में भारी वर्षा की भविष्यवाणी की है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) ने राज्य की राजधानी से दस हजार लोगों को बचाया है।

इस सप्ताह की शुरुआत में, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जल-पान वाली सड़कों से गुजरते हुए अपने पजामा को घुटनों तक मोड़ा, बचाव और पुनर्वास कार्य का निरीक्षण किया। “सभी संभव प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों से धैर्य रखने का आग्रह किया जाता है। राजेंद्र नगर और कंकर बाग जैसे सबसे अधिक प्रभावित इलाके निचले इलाकों में हैं और इसलिए जल-जमाव की चपेट में हैं।

मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है

पटना, वैशाली, बेगूसराय और खगड़िया सहित आसपास के इलाकों में मौसम विभाग ने  ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पट में बीते कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही थी, जिसकी वजह से शहर में पानी भरने गया है। अभी दो दिन से बारिश तो नहीं हुई लेकिन पानी जम गया है जो मुश्किलें पैदा कर रहा है। बिहार में बक्सर को छोड़कर सभी बाढ़ क्षेत्रों में गंगा खतरे के स्तर से ऊपर बह रही है।

फेसबुक पर आ रहा है ये फीचर हाईड कर सकगे लाइक ।

फेसबुक पर आ रहा है ये फीचर हाईड कर सकगे लाइक ।

फेसबुक एक नए फीचर की टेस्टिंग कर रहा है. इसके बारे में रिपोर्ट पहले से आ रही थीं और हमने आपको इसके बारे में बताया था. अब ये लगभग कन्फर्म्ड है. फेसबुक एक ऐसे फीचर पर काम कर रहा है जिससे यूजर्स अपने पोस्ट या फोटो के लाइक काउंट को हाइड कर सकते हैं. लाइक काउंट में हर तरह के रिएक्शन भी शामिल होंगे.

सेटिंग्स बदलने पर लाइक्स या रिएक्शन्स सिर्फ उसी यूजर को दिखेंगे जिन्हों वो पोस्ट या फोटो फेसबुक पर अपडेट की है. इसी साल इंस्टाग्राम के लिए भी इस तरह के फीचर की टेस्टिंग की गई है. इसे कंपनी प्राइवेसी को मजबूत करने के मकसद से ला रही है.

टेक क्रंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक लाइक काउंट हाइड करने का ये फीचर सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में देगा. इसे 27 सितंबर से शुरू किया जाएगा. टेक क्रंच ने फेसबुक के एक स्पोक्सपर्सन के हवाले से कहा है कि कंपनी इस फीचर के लिए लोगों से फीडबैक लेगी और इसे लोगों के अनुभव को बेहतर बनाया जाएगा.

बताया जा रहा है कि इस फीचर से उन लोगों को भी फायदा होगा जो फेसबुक पर कम लाइक्स की वजह से परेशान रहते हैं. रिसर्च से ये भी पता चला है कि फेसबुक पोस्ट पर कम लाइक्स की वजह से कई लोग या तो पोस्ट करने से कतराते हैं या फिर पोस्ट डिलीट कर देते हैं. फेसबुक का टार्गेट उन लोगों को एक नया अनुभव देना है.

यहां फेसबुक का लक्ष्य लोगों को खुद को व्यक्त करने में सहज बनाना है। यह चाहता है कि उपयोगकर्ता उन चीजों की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करें जो वे साझा करते हैं और यह उन्हें उन लोगों के साथ जोड़ता है जिनकी वे परवाह करते हैं, न कि केवल उन लोगों की संख्या जो अंगूठे से टकराते हैं। समाचार फ़ीड टीम द्वारा परीक्षण किए जा रहे हैं जो मुख्य Facebook ऐप पर VP Fidji Simo के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि इंस्टाग्राम टेस्ट डेटा वापस पाने के लिए शुरू कर रहे हैं, फेसबुक मुझे बताता है कि ऐप के इतने अलग होने के बाद से इसके खुद के परीक्षण आवश्यक हैं।

दोस्तों के पोस्ट पर बड़ी संख्या के बिना, जो उपयोगकर्ताओं को अपमानजनक महसूस कर सकते हैं, या अपने स्वयं के पोस्ट पर कम संख्या में उनके खराब स्वागत की घोषणा कर सकते हैं, उपयोगकर्ता फेसबुक पर अधिक लापरवाह महसूस कर सकते हैं। निष्कासन भी झुंड मानसिकता को कम कर सकता है, उपयोगकर्ताओं को स्वयं के लिए निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करता है कि क्या वे किसी पोस्ट का आनंद लेने के बजाय केवल आँख बंद करके हर किसी के लिए सहमत हो सकते हैं.

आधार कार्ड में फोटो अपडेट करना हुआ आसान और नाम और जन्म तिथि गलत होने पर करा सकेंगे अपडेट

आधार कार्ड में फोटो अपडेट करना हुआ आसान और नाम और जन्म तिथि गलत होने पर करा सकेंगे अपडेटआधार कार्ड में फोटो अपडेट करना हुआ आसान और नाम और जन्म तिथि गलत होने पर करा सकेंगे अपडेट

अब आप आसानी से आधार कार्ड में अपना लेटेस्ट फोटो अपडेट कर सकते हैं. इसके लिए आपको किसी भी तरह के कोई डॉक्युमेंट सबमिट करने की कोई जरूरत नहीं होगी. केवल यही नहीं, आप अपना बायोमेट्रिक, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी भी आसानी से अपडेट करा सकते हैं. इसके लिए आपको केवल अपने नजदीकी आधार सेंटर पर जाना होगा.

यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया  ने एक नोटिस जारी कर जानकारी दी है. इसमें कहा गया है कि आधार कोर्ड होल्डर्स की व्यक्तिगत जानकारी अपडेट करने के लिए आपको किसी भी तरह का डॉक्युमेंट सबमिट करने की जरूरत नहीं है.

आधार कार्ड  यानी बैंक खाते से लेकर पासपोर्ट बनवाने तक के लिए जरूरी दस्तावेज. लेकिन, आधार में यदि नाम यसा जन्म तिथि गलत हो तो वह आपके लिए परेशानी का सबब बन जाता है.

आधार कार्ड (Aadhaar Card)  यानी बैंक खाते से लेकर पासपोर्ट बनवाने तक के लिए जरूरी दस्तावेज. लेकिन, आधार में यदि नाम या जन्म तिथि गलत हो तो वह आपके लिए परेशानी का सबब बन जाता है. इसे देखते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरणने जन्म तिथि, नाम में बदलाव के लिए कुछ शर्तें तय की हैं. वहीं, मोबाइल नंबर और अन्य बदलावों के लिए डॉक्यूमेंट की जरूरत नहीं होगी.

UIDAI ने आधार में जन्म तिथि को अपडेट करने के लिए कुछ शर्तें तय की हैं. इसके अनुसार यदि आपकी बर्थ डेट में बदलाव की स्थिति में तीन साल से कम का अंतर है तो आप संबंधित डॉक्यूमेंट के साथ किसी भी नजदीकी आधार सुविधा केंद्र में जाकर उसमें सुधार करा सकते हैं. तीन साल से ज्यादा का अंतर होने पर आपको क्षेत्रीय आधार केंद्र में डॉक्यूमेंट्स लेकर जाना होगा.  ने कहा कि आधार में लिंग सुधार सुविधा अब एक बार ही मिलेगी.

अगर आपका आधार में नाम गलत छपा है और आप इसे अपडेट कराना चाहते हैं तो इसके लिए भी कुछ गाइडलाइंस तय की गई हैं. UIDAI के नए फैसले के अनुसार अब नाम अपडेट कराने के लिए सिर्फ दो ही मौके मिलेंगे. इसके बाद भी अगर नाम गलत रहता है तो उसे इनवेलिड कराकर नए कार्ड के आवेदन करना होगा.

आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आधार सेवा केंद्र पर आप जन्मतिथि एक बार, नाम दो बार और जेंडर एक बार ही अपडेट कर सकते हैं.

वित्त वर्ष में 2019-20 की पहली तिमाही में सिर्फ 1.7 फीसदी रहा, पहली तिमाही में इकॉनमी रही सुस्त

वित्त वर्ष में 2019-20 की पहली तिमाही में सिर्फ 1.7 फीसदी रहा, पहली तिमाही में इकॉनमी रही सुस्त

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गिरती महंगाई से यह संकेत मिलता है कि मांग में कमी आ रही है. रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट 2018-19 के मुताबिक खपत का जीडीपी में योगदान वित्त वर्ष 2012-14 के 71.5 फीसदी से घटकर वित्त वर्ष 2015-19 में 69.8 फीसदी ही रह गया.

उपभोग भारतीय अर्थव्यवस्था की तरक्की का बड़ा आधार है, क्योंकि जीडीपी में इसका सबसे बड़ा योगदान होता है, लेकिन हाल के वर्षों में इसका योगदान घटा है. शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गिरती महंगाई से यह संकेत मिलता है कि इन दोनों इलाकों में मांग में कमी आ रही है. रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट 2018-19 के मुताबिक खपत का जीडीपी में योगदान वित्त वर्ष 2012-14 के 71.5 फीसदी से घटकर वित्त वर्ष 2015-19 में 69.8 फीसदी ही रह गया.

लगातार घट रही खपत  

इस दौरान निजी क्षेत्र का उपभोग पर खर्च यानी प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्पेंडीचर (PFCE) 66.2 फीसदी से घटकर 57.5 फीसदी रह गया है. यह मांग में कमी का संकेत देता है. हालांकि, इस दौरान सरकारी उपभोग खर्च यानी गवर्नमेंट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडीचर (GFCE)  जीडीपी के 5.3 फीसदी से बढ़कर 12.3 फीसदी तक पहुंच गया है.

पिछले कुछ महीनों से तो और भी चिंताजनक संकेत मिल रहे हैं. PFCE वित्त वर्ष 2018-19 की तीसरी तिमाही के 58.8 फीसदी से घटकर चौथी तिमाही में 56.8 फीसदी और इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में महज 55.1 फीसदी रह गया.

इस गिरावट के बारे में रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पीएफसीई में कमजोरी शुरुआती अनुमान से ज्यादा है और इसमें शहरी और ग्रामीण, दोनों इलाकों में कटौती हुई है जो इस बात का संकेत है कि अर्थव्यवस्था में गिरावट व्यापक है.’

कम महंगाई की चिंता

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गिरती महंगाई से यह संकेत मिलता है कि इन दोनों इलाकों में मांग में कमी आ रही है. समूची (ग्रामीण और शहरी) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI आधारित महंगाई पिछले दो वित्त वर्ष में 4 फीसदी से नीचे ही रहा है.  वित्त वर्ष 2019 में ग्रामीण महंगाई 2.99 फीसदी और शहरी महंगाई 3.92 फीसदी रही है.

प्रति व्यक्ति आय बनाम प्रति व्यक्ति खपत

यह बात अब छुपी  नहीं है कि ग्रामीण और शहरी, दोनों इलाकों में लोगों की आय घट रही है. मांग में मौजूदा कमी की मूल वजह पर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की साल 2019 की एक स्टडी के मुताबिक, शहरी और ग्रामीण वेतन-मजदूरी में भारी गिरावट आई है और यह आर्थिक सुस्ती की ‘सबसे महत्वपूर्ण’ वजह है.

स्टडी के मुताबिक कुछ साल पहले शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में लोगों के वेतन-मजदूरी (वेज) में दो अंकों में बढ़त हो रही थी. शहरी इलाकों में तो पगार में बढ़त साल 2010-11 में 20.5 फीसदी तक पहुंच गई थी और यह साल 2018-19 में घटकर एक अंक में आ गई. इसी तरह ग्रामीण वेतन-मजदूरी में बढ़त साल 2013-14 में 27.4 फीसदी के शीर्ष स्तर तक पहुंच गई थी, जबकि पिछले तीन वित्त वर्ष में तो यह घटकर 5 फीसदी से भी कम रह गया.

प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय (NNI) और प्रति व्यक्ति अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) में बढ़त के एक विश्लेषण से बहुत रोचक आंकड़े सामने आते हैं. दोनों वित्त वर्ष 2017 के स्तर से कम हैं. हालांकि वित्त 2019 में PFCE पिछले साल के 6 फीसदी से बढ़कर 6.8 फीसदी पहुंच गया, जबकि प्रति व्यक्ति NNI में गिरावट लगातार जारी है. यह वित्त वर्ष 2017 के 6.8 फीसदी से घटकर वित्त वर्ष 2018 में घटकर 5.7 फीसदी और वित्त वर्ष 2019 में 5.6 फीसदी रह गई.

भारत के मोटर वाहन अधिनियम के तहत नए जुर्माने ।

भारत के मोटर वाहन अधिनियम के तहत नए जुर्माने।

भारत में नए यातायात नियम और जुर्माना 2019: मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की 63 धाराओं के साथ, 1 सितंबर से लागू होने के बाद, केंद्र देश भर में सबसे आम यातायात उल्लंघन में से कुछ पर शिकंजा कसने के लिए तैयार है। । जबकि राज्य एक अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया में हैं, केंद्र ने उन अपराधों की एक सूची तैयार की है जिन्हें जटिल किया जा सकता है।

सरकार ने मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 के 63 प्रावधानों को अधिसूचित किया है, जिनमें विभिन्न यातायात अपराधों के लिए 1 सितंबर से दंडित किया गया है। नए नियमों में नशे में गाड़ी चलाने पर जुर्माने में 6 महीने तक की कैद और जुर्माना भी शामिल है। पहले अपराध के लिए 10,000 रुपये तक और 2 साल तक की कैद और / या दूसरे अपराध के लिए 15,000 रुपये का जुर्माना। इसके अलावा, बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाने पर जुर्माना 500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये किया जाएगा। सीटबेल्ट न पहनने का जुर्माना मौजूदा समय में 100 रुपये के मुकाबले 1,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। ओवर स्पीडिंग पेनल्टी 400 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये से 2,000 रुपये कर दी गई है

मोटर वाहन अधिनियम, 2019 नए नियम: अपराधों की सूची और संशोधित दंड

सामान्य दंड – पहला अपराध 500 रुपये तक का, दूसरा अपराध-जुर्माना 1,500 रुपये तक

सड़क विनियमन का उल्लंघन – 500 रु

बिना टिकट यात्रा करना – 500 रुपये तक का जुर्माना

अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और सूचना देने से मना करना – 2,000 रुपये तक का जुर्माना

मोटर वाहन अधिनियम: राज्यों ने यातायात उल्लंघन के लिए भारी जुर्माना लगाया है

बिना लाइसेंस के वाहनों का अनाधिकृत उपयोग – 5,000 रु

बिना लाइसेंस के ड्राइविंग – 5,000 रुपये का जुर्माना

अयोग्यता के बावजूद ड्राइविंग – 10,000 रुपये का जुर्माना

अयोग्यता के बाद एक कंडक्टर के रूप में कार्य करना – 10,000 रुपये तक जुर्माना

मोटर वाहनों और घटकों के निर्माण, रखरखाव, बिक्री और परिवर्तन से संबंधित जुर्माना – 1 वर्ष तक कारावास और / या प्रति वाहन 1,00,000 रुपये तक का जुर्माना।

दोषपूर्ण वाहन – 1 वर्ष तक कारावास और / या दोषपूर्ण ऑटोमोबाइल के लिए 1,00,000 रुपये तक का जुर्माना।

नियमों के उल्लंघन में महत्वपूर्ण सुरक्षा घटक की बिक्री – 1 वर्ष तक कारावास और / या प्रति घटक 1,00,000 रुपये का जुर्माना।

नियमों के उल्लंघन में रेट्रोफिटिंग का परिवर्तन
– छह महीने तक कारावास और / या प्रति माह 5,000 रुपये का जुर्माना

ओवरसाइज वाहन – 5,000 रु

ओवर-स्पीडिंग – एलएमवी के लिए 1,000 रुपये से 2,000 रुपये; मध्यम यात्री या माल वाहनों के लिए रु 2,000 से रु 4,000; ड्राइविंग लाइसेंस का दूसरा बाद में अपराध-परित्याग

खतरनाक ड्राइविंग के लिए जुर्माना – पहला अपराध – छह महीने से एक साल की जेल और / या जुर्माना 1,000 रुपये से 5,000 रुपये; बाद में अपराध (पहले अपराध से तीन साल के भीतर) – दो साल तक कारावास और / या 10,000 रुपये

नशे में गाड़ी चलाना – पहला अपराध- 10,000 रुपये तक का जुर्माना और / या छह महीने तक कारावास; दूसरा अपराध- 3,000 रुपये का जुर्माना और / या दो साल तक कारावास

मानसिक रूप से या शारीरिक रूप से अनफिट होने पर ड्राइविंग के लिए जुर्माना – पहला अपराध – 1,000 रुपये तक का जुर्माना; दूसरा अपराध – 2,000 रुपये तक का जुर्माना

दुर्घटना से संबंधित अपराधों के लिए दंड (धारा 132 (i), 133 और 134) – पहला अपराध – 5,000 रुपये तक का जुर्माना और / या 6 महीने का कारावास; दूसरा अपराध- 10,000 रुपये तक का जुर्माना और / या 1 साल की कैद

चंद्रयान 2: लॉन्चिंग से लेकर अब तक की पूरी कहानी ।

चंद्रयान 2: लॉन्चिंग से लेकर अब तक की पूरी कहानी ।

चंद्रयान-२ या द्वितीय चन्द्रयान, चंद्रयान-1 के बाद भारत का दूसरा चन्द्र अभियान है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने विकसित किया है। अभियान को जीएसएलवी संस्करण 3 प्रक्षेपण यान द्वारा प्रक्षेपित किया गया। इस अभियान में भारत में निर्मित एक चंद्र कक्षयान, एक रोवर एवं एक लैंडर शामिल हैं। इन सब का विकास इसरो द्वारा किया गया है।भारत ने चंद्रयान-2 को 22 जुलाई 2019 को श्रीहरिकोटा रेंज से भारतीय समयानुसार 02:43 AM सफलता पूर्वक प्रक्षेपित किया। इससे एक हफ्ते पहले कुछ तकनीकी गड़बड़ी के कारण चंद्रयान 2 को लांच के एक घंटे पहले रोकना पड़ा ।

2 सितंबर 2019

रात 3 :45 को, विक्रम लैंडर ने ऑर्बिटर की परिक्रमा छोड़ दी और चंद्रमा की ओर चल दिया।

07 सितंबर 2019

चंद्रयान-2 के अंतिम चरण में भारत के मून लैंडर विक्रम से उस समय संपर्क टूट गया था जब वह चंद्रमा की सतह की ओर बढ़ रहा था. इसरो के अनुसार, रात 1:37 बजे लैंडर की चांद पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की प्रक्रिया शुरू हो गई थी. लेकिन लगभग 2.1 किमी ऊपर संपर्क टूट गया था. इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा की डेटा की समीक्षा की जा रही है.

08 सितंबर 2019

इसरो द्वारा सूचना दी गई कि ओरबिटर द्‍वारा  लिए गए थर्मल इमेज से विक्रम लैंडर का पता चल गया है। परंतु अभी चंद्रयान-2 से संपर्क नहीं हो पाया था।

09 सितंबर 2019

इसरो द्वारा सूचना दी गई कि लैंडर क्रैश नहीं हुआ है बस चन्द्रमा की सतह पर थोड़ा ठेडा खड़ा है, परंतु अभी चंद्रयान-2 से संपर्क बनने का प्रयास जारी है ।

यूपी की जनता पर महंगी बिजली की मार ,बिजली हुई 15% तक हुई महंगी।

यूपी की जनता पर महंगी बिजली की मार ,बिजली हुई 15% तक हुई महंगी।

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) ने मंगलवार को विभिन्न उपभोक्ता श्रेणियों के लिए बिजली दरों में 12% की वृद्धि को मंजूरी दे दी.

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यूपीईआरसी द्वारा बिजली दरों में 8-12% की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। नियामक अधिभार में कटौती के बाद बिजली दरों में वास्तविक वृद्धि 3.72% से 7.72% होगी.

पहले 150 इकाइयों के लिए प्रति यूनिट per 4.90 की वर्तमान दर के खिलाफ, बिजली नियामक ने टैरिफ को लगभग 12% बढ़ाकर of 5.50 प्रति यूनिट कर दिया है। 151-300 इकाइयों, 301-500 इकाइयों और 500 से अधिक इकाइयों के लिए शुल्क वर्तमान में, 5.40 से from 6 प्रति यूनिट बढ़ाए गए हैं, क्रमशः 6.20 से from 6.50 प्रति यूनिट और 50 6.50 से from 7 प्रति यूनिट.

किसानों को भी बड़ा झटका

ग्रामीण इलाकों में फिक्स चार्ज 400 से बढ़ाकर 500 रुपये किए गए. ग्रामीण कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं को पहले से 15 फीसदी अधिक बिजली बिल भरेगा पड़ेगा, अब इन्हें 50 रुपये फिक्स चार्ज और तीन रुपये प्रति यूनिट (100 यूनिट तक) लगेगा जो अभी तक नहीं लगता था. उत्तर प्रदेश में करीब 2 करोड़ 70 लाख बिजली उपभोक्ता हैं. पावर यूटिलिटी उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने 25 फीसदी तक दाम बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था.

फिलहाल उत्तर प्रदेश में ग्रामीण उपभोक्ताओं को 100 यूनिट तक के इस्तेमाल पर 3.0 रुपये प्रति यूनिट, 100 से 150 यूनिट तक 3.50 रुपये प्रति यूनिट और 150 से 300 यूनिट के लिए 4.50 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से भुगतान करना पड़ता है.

इंडस्ट्री के लिए भी बिजली महंगी

वहीं औद्योगिक उपभोक्ताओं में पांच से 10 फीसदी दाम बढ़ाए गए हैं. इन्हें अब प्रति यूनिट 30 पैसे अधिक देने होंगे. उद्योगों को गर्मियों में सुबह और सर्दियों के मौसम में रात में बिजली उपयोग करने पर 15 फीसदी तक छूट मिलेगी.

बता दें, अगस्त महीने में पीक आवर के दौरान उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग 21,500 मेगावॉट के पार पहुंच गई थी. वहीं, बिजली की उपलब्धता 19,500 मेगावॉट के करीब थी. उत्तर प्रदेश में कुल 2 करोड़ 70 लाख बिजली उपभोक्ता हैं.

गौरतलब है कि 2017 में योगी सरकार बनने के बाद निकाय चुनाव खत्म होते ही बिजली की दरों में करीब 12.73 फीसदी का इजाफा किया गया था. उस समय भी सरकार के इस फैसले का विरोध हुआ था, और अब भी हो रहा है. बीएसपी प्रमुख मायावती ने बिजली की दरों को बढ़ाने को मंजूरी देना पूरी तरह से जनविरोधी फैसला बताया है.

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