Day: September 5, 2019

यूपी की जनता पर महंगी बिजली की मार ,बिजली हुई 15% तक हुई महंगी।

यूपी की जनता पर महंगी बिजली की मार ,बिजली हुई 15% तक हुई महंगी।

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) ने मंगलवार को विभिन्न उपभोक्ता श्रेणियों के लिए बिजली दरों में 12% की वृद्धि को मंजूरी दे दी.

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यूपीईआरसी द्वारा बिजली दरों में 8-12% की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। नियामक अधिभार में कटौती के बाद बिजली दरों में वास्तविक वृद्धि 3.72% से 7.72% होगी.

पहले 150 इकाइयों के लिए प्रति यूनिट per 4.90 की वर्तमान दर के खिलाफ, बिजली नियामक ने टैरिफ को लगभग 12% बढ़ाकर of 5.50 प्रति यूनिट कर दिया है। 151-300 इकाइयों, 301-500 इकाइयों और 500 से अधिक इकाइयों के लिए शुल्क वर्तमान में, 5.40 से from 6 प्रति यूनिट बढ़ाए गए हैं, क्रमशः 6.20 से from 6.50 प्रति यूनिट और 50 6.50 से from 7 प्रति यूनिट.

किसानों को भी बड़ा झटका

ग्रामीण इलाकों में फिक्स चार्ज 400 से बढ़ाकर 500 रुपये किए गए. ग्रामीण कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं को पहले से 15 फीसदी अधिक बिजली बिल भरेगा पड़ेगा, अब इन्हें 50 रुपये फिक्स चार्ज और तीन रुपये प्रति यूनिट (100 यूनिट तक) लगेगा जो अभी तक नहीं लगता था. उत्तर प्रदेश में करीब 2 करोड़ 70 लाख बिजली उपभोक्ता हैं. पावर यूटिलिटी उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने 25 फीसदी तक दाम बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था.

फिलहाल उत्तर प्रदेश में ग्रामीण उपभोक्ताओं को 100 यूनिट तक के इस्तेमाल पर 3.0 रुपये प्रति यूनिट, 100 से 150 यूनिट तक 3.50 रुपये प्रति यूनिट और 150 से 300 यूनिट के लिए 4.50 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से भुगतान करना पड़ता है.

इंडस्ट्री के लिए भी बिजली महंगी

वहीं औद्योगिक उपभोक्ताओं में पांच से 10 फीसदी दाम बढ़ाए गए हैं. इन्हें अब प्रति यूनिट 30 पैसे अधिक देने होंगे. उद्योगों को गर्मियों में सुबह और सर्दियों के मौसम में रात में बिजली उपयोग करने पर 15 फीसदी तक छूट मिलेगी.

बता दें, अगस्त महीने में पीक आवर के दौरान उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग 21,500 मेगावॉट के पार पहुंच गई थी. वहीं, बिजली की उपलब्धता 19,500 मेगावॉट के करीब थी. उत्तर प्रदेश में कुल 2 करोड़ 70 लाख बिजली उपभोक्ता हैं.

गौरतलब है कि 2017 में योगी सरकार बनने के बाद निकाय चुनाव खत्म होते ही बिजली की दरों में करीब 12.73 फीसदी का इजाफा किया गया था. उस समय भी सरकार के इस फैसले का विरोध हुआ था, और अब भी हो रहा है. बीएसपी प्रमुख मायावती ने बिजली की दरों को बढ़ाने को मंजूरी देना पूरी तरह से जनविरोधी फैसला बताया है.

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