Month: September 2019

फेसबुक पर आ रहा है ये फीचर हाईड कर सकगे लाइक ।

फेसबुक पर आ रहा है ये फीचर हाईड कर सकगे लाइक ।

फेसबुक एक नए फीचर की टेस्टिंग कर रहा है. इसके बारे में रिपोर्ट पहले से आ रही थीं और हमने आपको इसके बारे में बताया था. अब ये लगभग कन्फर्म्ड है. फेसबुक एक ऐसे फीचर पर काम कर रहा है जिससे यूजर्स अपने पोस्ट या फोटो के लाइक काउंट को हाइड कर सकते हैं. लाइक काउंट में हर तरह के रिएक्शन भी शामिल होंगे.

सेटिंग्स बदलने पर लाइक्स या रिएक्शन्स सिर्फ उसी यूजर को दिखेंगे जिन्हों वो पोस्ट या फोटो फेसबुक पर अपडेट की है. इसी साल इंस्टाग्राम के लिए भी इस तरह के फीचर की टेस्टिंग की गई है. इसे कंपनी प्राइवेसी को मजबूत करने के मकसद से ला रही है.

टेक क्रंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक लाइक काउंट हाइड करने का ये फीचर सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में देगा. इसे 27 सितंबर से शुरू किया जाएगा. टेक क्रंच ने फेसबुक के एक स्पोक्सपर्सन के हवाले से कहा है कि कंपनी इस फीचर के लिए लोगों से फीडबैक लेगी और इसे लोगों के अनुभव को बेहतर बनाया जाएगा.

बताया जा रहा है कि इस फीचर से उन लोगों को भी फायदा होगा जो फेसबुक पर कम लाइक्स की वजह से परेशान रहते हैं. रिसर्च से ये भी पता चला है कि फेसबुक पोस्ट पर कम लाइक्स की वजह से कई लोग या तो पोस्ट करने से कतराते हैं या फिर पोस्ट डिलीट कर देते हैं. फेसबुक का टार्गेट उन लोगों को एक नया अनुभव देना है.

यहां फेसबुक का लक्ष्य लोगों को खुद को व्यक्त करने में सहज बनाना है। यह चाहता है कि उपयोगकर्ता उन चीजों की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करें जो वे साझा करते हैं और यह उन्हें उन लोगों के साथ जोड़ता है जिनकी वे परवाह करते हैं, न कि केवल उन लोगों की संख्या जो अंगूठे से टकराते हैं। समाचार फ़ीड टीम द्वारा परीक्षण किए जा रहे हैं जो मुख्य Facebook ऐप पर VP Fidji Simo के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि इंस्टाग्राम टेस्ट डेटा वापस पाने के लिए शुरू कर रहे हैं, फेसबुक मुझे बताता है कि ऐप के इतने अलग होने के बाद से इसके खुद के परीक्षण आवश्यक हैं।

दोस्तों के पोस्ट पर बड़ी संख्या के बिना, जो उपयोगकर्ताओं को अपमानजनक महसूस कर सकते हैं, या अपने स्वयं के पोस्ट पर कम संख्या में उनके खराब स्वागत की घोषणा कर सकते हैं, उपयोगकर्ता फेसबुक पर अधिक लापरवाह महसूस कर सकते हैं। निष्कासन भी झुंड मानसिकता को कम कर सकता है, उपयोगकर्ताओं को स्वयं के लिए निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करता है कि क्या वे किसी पोस्ट का आनंद लेने के बजाय केवल आँख बंद करके हर किसी के लिए सहमत हो सकते हैं.

178 साल पुरानी ट्रैवल कंपनी थॉमस कुक हुई दिवालिया, खतरे में 22 हजार नौकरियां।

178 साल पुरानी ट्रैवल कंपनी थॉमस कुक हुई दिवालिया, खतरे में 22 हजार नौकरियां।

कंपनी के अचानक बंद होने से छुट्टियां मनाने घर से निकले करीब 1.50 लाख लोग जहां-तहां फंस गए हैं। दुनियाभर में इसके 22 हजार कर्मचारियों की नौकरी भी संकट में आ गई है। इनमें से 9000 कर्मचारी ब्रिटेन में हैं।

ब्रिटेन की 178 साल पुरानी ट्रैवल कंपनी थॉमस कुक ने कारोबार बंद करने की घोषणा कर दी है। आर्थिक संकट से जूझ रही कंपनी ने निजी निवेश और सरकार से बेलआउट पैकेज प्राप्त करने में असफलता के बाद कहा है कि तत्काल प्रभाव से कंपनी ने अपने कारोबार को बंद करने का फैसला किया है। कंपनी ने सभी हॉलिडेज, फ्लाइट बुकिंग को रद्द किए जाने की घोषणा की है। कंपनी ने दुनियाभर के ग्राहकों के लिए सहायता नंबर +44 1753 330 330 जारी किया है।

दुनियाभर में इसके 22 हजार कर्मचारियों की नौकरी भी संकट में आ गई है। इनमें से 9000 कर्मचारी ब्रिटेन में हैं।

कंपनी ने शुक्रवार को कहा था कि कारोबार जारी रखने के लिए उसे 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर की जरूरत है, जबकि पिछले महीने कंपनी 90 करोड़ पाउंड हासिल करने में कामयाब रही थी। निजी निवेश जुटाने में असफल रही कंपनी को सरकार के हस्तक्षेप से ही बचाया जा सकता था।

थॉमस कुक ने 1841 के ट्रैवल इंडसट्री में कदम रखते हुए कंपनी की स्थापना की थी। वह ब्रिटेन के शहरों के बीच टेंपरेंस सपॉर्टर्स को ट्रेन के जरिए पहुंचाता था। जल्द कंपनी विदेशी ट्रिप्स कराने लगी। 1855 में कंपनी पहली ऐसी ऑपरेटर बनी जो ब्रिटिश यात्रियों को एस्कॉर्ट ट्रिप पर यूरोपीय देशों में ले जाती थी। इसके बाद 1866 में कंपनी अमेरिका ट्रिप सर्विस देने लगी और 1872 में पूरी दुनिया के टूर सर्विस देने लगी।

यूके की नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (CAA) ने कहा है कि थॉमस कूक ने अब कारोबार बंद कर दिया है और रेगुलेटर व सरकार अगले दो सप्ताह में 150,000 से अधिक ब्रिटिश ग्राहकों को घर वापस लाने के लिए मिलकर काम करेंगे।

कंपनी के चीफ एग्जिक्युटिव ने सोमवार सुबह एक बयान जारी करते हुए कहा, “मैं अपने लाखों ग्राहकों, हजारों कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं और साझेदारों से माफी मांगना चाहूंगा, जिन्होंने कई वर्षों तक हमारा साथ दिया है।” उन्होंने कहा कि यह मेरे और बाकी बोर्ड के लिए गहरे अफसोस की बात है कि हम सफल नहीं हुए।

गौरतलब है कि थॉमस कुक ने पिछले महीने रिकैपिटलाइजेशन से जुड़ी योजना को लेकर चीन की शेयरहोल्डर फोसुन के साथ एक सौदे की प्रमुख शर्तों को पर सहमति जताई थी। इस सौदे का आकार 1.1 अरब डॉलर था।

आधार कार्ड में फोटो अपडेट करना हुआ आसान और नाम और जन्म तिथि गलत होने पर करा सकेंगे अपडेट

आधार कार्ड में फोटो अपडेट करना हुआ आसान और नाम और जन्म तिथि गलत होने पर करा सकेंगे अपडेटआधार कार्ड में फोटो अपडेट करना हुआ आसान और नाम और जन्म तिथि गलत होने पर करा सकेंगे अपडेट

अब आप आसानी से आधार कार्ड में अपना लेटेस्ट फोटो अपडेट कर सकते हैं. इसके लिए आपको किसी भी तरह के कोई डॉक्युमेंट सबमिट करने की कोई जरूरत नहीं होगी. केवल यही नहीं, आप अपना बायोमेट्रिक, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी भी आसानी से अपडेट करा सकते हैं. इसके लिए आपको केवल अपने नजदीकी आधार सेंटर पर जाना होगा.

यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया  ने एक नोटिस जारी कर जानकारी दी है. इसमें कहा गया है कि आधार कोर्ड होल्डर्स की व्यक्तिगत जानकारी अपडेट करने के लिए आपको किसी भी तरह का डॉक्युमेंट सबमिट करने की जरूरत नहीं है.

आधार कार्ड  यानी बैंक खाते से लेकर पासपोर्ट बनवाने तक के लिए जरूरी दस्तावेज. लेकिन, आधार में यदि नाम यसा जन्म तिथि गलत हो तो वह आपके लिए परेशानी का सबब बन जाता है.

आधार कार्ड (Aadhaar Card)  यानी बैंक खाते से लेकर पासपोर्ट बनवाने तक के लिए जरूरी दस्तावेज. लेकिन, आधार में यदि नाम या जन्म तिथि गलत हो तो वह आपके लिए परेशानी का सबब बन जाता है. इसे देखते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरणने जन्म तिथि, नाम में बदलाव के लिए कुछ शर्तें तय की हैं. वहीं, मोबाइल नंबर और अन्य बदलावों के लिए डॉक्यूमेंट की जरूरत नहीं होगी.

UIDAI ने आधार में जन्म तिथि को अपडेट करने के लिए कुछ शर्तें तय की हैं. इसके अनुसार यदि आपकी बर्थ डेट में बदलाव की स्थिति में तीन साल से कम का अंतर है तो आप संबंधित डॉक्यूमेंट के साथ किसी भी नजदीकी आधार सुविधा केंद्र में जाकर उसमें सुधार करा सकते हैं. तीन साल से ज्यादा का अंतर होने पर आपको क्षेत्रीय आधार केंद्र में डॉक्यूमेंट्स लेकर जाना होगा.  ने कहा कि आधार में लिंग सुधार सुविधा अब एक बार ही मिलेगी.

अगर आपका आधार में नाम गलत छपा है और आप इसे अपडेट कराना चाहते हैं तो इसके लिए भी कुछ गाइडलाइंस तय की गई हैं. UIDAI के नए फैसले के अनुसार अब नाम अपडेट कराने के लिए सिर्फ दो ही मौके मिलेंगे. इसके बाद भी अगर नाम गलत रहता है तो उसे इनवेलिड कराकर नए कार्ड के आवेदन करना होगा.

आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आधार सेवा केंद्र पर आप जन्मतिथि एक बार, नाम दो बार और जेंडर एक बार ही अपडेट कर सकते हैं.

वित्त वर्ष में 2019-20 की पहली तिमाही में सिर्फ 1.7 फीसदी रहा, पहली तिमाही में इकॉनमी रही सुस्त

वित्त वर्ष में 2019-20 की पहली तिमाही में सिर्फ 1.7 फीसदी रहा, पहली तिमाही में इकॉनमी रही सुस्त

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गिरती महंगाई से यह संकेत मिलता है कि मांग में कमी आ रही है. रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट 2018-19 के मुताबिक खपत का जीडीपी में योगदान वित्त वर्ष 2012-14 के 71.5 फीसदी से घटकर वित्त वर्ष 2015-19 में 69.8 फीसदी ही रह गया.

उपभोग भारतीय अर्थव्यवस्था की तरक्की का बड़ा आधार है, क्योंकि जीडीपी में इसका सबसे बड़ा योगदान होता है, लेकिन हाल के वर्षों में इसका योगदान घटा है. शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गिरती महंगाई से यह संकेत मिलता है कि इन दोनों इलाकों में मांग में कमी आ रही है. रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट 2018-19 के मुताबिक खपत का जीडीपी में योगदान वित्त वर्ष 2012-14 के 71.5 फीसदी से घटकर वित्त वर्ष 2015-19 में 69.8 फीसदी ही रह गया.

लगातार घट रही खपत  

इस दौरान निजी क्षेत्र का उपभोग पर खर्च यानी प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्पेंडीचर (PFCE) 66.2 फीसदी से घटकर 57.5 फीसदी रह गया है. यह मांग में कमी का संकेत देता है. हालांकि, इस दौरान सरकारी उपभोग खर्च यानी गवर्नमेंट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडीचर (GFCE)  जीडीपी के 5.3 फीसदी से बढ़कर 12.3 फीसदी तक पहुंच गया है.

पिछले कुछ महीनों से तो और भी चिंताजनक संकेत मिल रहे हैं. PFCE वित्त वर्ष 2018-19 की तीसरी तिमाही के 58.8 फीसदी से घटकर चौथी तिमाही में 56.8 फीसदी और इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में महज 55.1 फीसदी रह गया.

इस गिरावट के बारे में रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पीएफसीई में कमजोरी शुरुआती अनुमान से ज्यादा है और इसमें शहरी और ग्रामीण, दोनों इलाकों में कटौती हुई है जो इस बात का संकेत है कि अर्थव्यवस्था में गिरावट व्यापक है.’

कम महंगाई की चिंता

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गिरती महंगाई से यह संकेत मिलता है कि इन दोनों इलाकों में मांग में कमी आ रही है. समूची (ग्रामीण और शहरी) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI आधारित महंगाई पिछले दो वित्त वर्ष में 4 फीसदी से नीचे ही रहा है.  वित्त वर्ष 2019 में ग्रामीण महंगाई 2.99 फीसदी और शहरी महंगाई 3.92 फीसदी रही है.

प्रति व्यक्ति आय बनाम प्रति व्यक्ति खपत

यह बात अब छुपी  नहीं है कि ग्रामीण और शहरी, दोनों इलाकों में लोगों की आय घट रही है. मांग में मौजूदा कमी की मूल वजह पर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की साल 2019 की एक स्टडी के मुताबिक, शहरी और ग्रामीण वेतन-मजदूरी में भारी गिरावट आई है और यह आर्थिक सुस्ती की ‘सबसे महत्वपूर्ण’ वजह है.

स्टडी के मुताबिक कुछ साल पहले शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में लोगों के वेतन-मजदूरी (वेज) में दो अंकों में बढ़त हो रही थी. शहरी इलाकों में तो पगार में बढ़त साल 2010-11 में 20.5 फीसदी तक पहुंच गई थी और यह साल 2018-19 में घटकर एक अंक में आ गई. इसी तरह ग्रामीण वेतन-मजदूरी में बढ़त साल 2013-14 में 27.4 फीसदी के शीर्ष स्तर तक पहुंच गई थी, जबकि पिछले तीन वित्त वर्ष में तो यह घटकर 5 फीसदी से भी कम रह गया.

प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय (NNI) और प्रति व्यक्ति अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) में बढ़त के एक विश्लेषण से बहुत रोचक आंकड़े सामने आते हैं. दोनों वित्त वर्ष 2017 के स्तर से कम हैं. हालांकि वित्त 2019 में PFCE पिछले साल के 6 फीसदी से बढ़कर 6.8 फीसदी पहुंच गया, जबकि प्रति व्यक्ति NNI में गिरावट लगातार जारी है. यह वित्त वर्ष 2017 के 6.8 फीसदी से घटकर वित्त वर्ष 2018 में घटकर 5.7 फीसदी और वित्त वर्ष 2019 में 5.6 फीसदी रह गई.

यूएस V/S ईरान: सऊदी अरब की तेल रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ के अनुसार ईरान ने करवाया हमला ।

यूएस V/S ईरान: सऊदी अरब की तेल रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ के अनुसार ईरान ने  करवाया हमला ।

सऊदी अरब में दो प्रमुख तेल सुविधाओं पर ड्रोन हमलों के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है।

शनिवार को पूर्व-सुबह के हमलों ने दुनिया के शीर्ष निर्यातक – कच्चे तेल के उत्पादन के आधे से अधिक कच्चे तेल के उत्पादन में दस्तक दी, और वैश्विक स्तर पर प्रतिदिन 5.7 मिलियन बैरल से उत्पादन में कटौती की।

यमन के हौथी विद्रोही, जो 2015 से सऊदी-यूएई के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ युद्ध में बंद हैं, ने हमलों की जिम्मेदारी ली, सऊदी अरब को चेतावनी दी कि उनके लक्ष्य “विस्तार करते रहेंगे”।

लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने बिना किसी सबूत के ईरान पर हमले के पीछे होने का आरोप लगाया। तेहरान द्वारा दावे को खारिज कर दिया गया था जिसमें कहा गया था कि आरोप इसके खिलाफ कार्रवाई को सही ठहराने के लिए थे।

इस बीच, सऊदी अरब ने “इस आतंकवादी आक्रमण का सामना करने और निपटने के लिए” का वादा किया है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रियाद के हमलों की अपनी जांच के बाद संभावित सैन्य कार्रवाई का संकेत दिया।

ट्रंप का कहना है कि ‘सऊदी हमलों के लिए जिम्मेदार ईरान’ दिखता है

ट्रम्प ने कहा कि यह “जैसा दिख रहा है” सऊदी अरब में प्रमुख तेल प्रतिष्ठानों पर हमलों के लिए जिम्मेदार था, लेकिन उन्होंने कहा कि वह युद्ध नहीं चाहते हैं।

व्हाइट हाउस में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका तब तक जवाबी विकल्प नहीं देख रहा है जब तक उसके पास “निश्चित प्रमाण” नहीं है कि ईरान जिम्मेदार था।

फिर भी, ट्रम्प ने ओवल कार्यालय में संवाददाताओं से कहा कि अगर हमले की प्रतिक्रिया मिलती है तो अमेरिका “तैयार” है।

तेल की कीमत लगभग 15 प्रतिशत बढ़ गई

रिकॉर्ड ट्रेडिंग वॉल्यूम के बीच 30 से अधिक वर्षों में ब्रेंट क्रूड की सबसे बड़ी उछाल के साथ तेल की कीमतें सोमवार को लगभग 15 प्रतिशत अधिक हो गईं।

ब्रेंट क्रूड वायदा $ 69.02 प्रति बैरल पर बसा, जो $ 8.80 या 14.6 प्रतिशत बढ़ गया – कम से कम 1988 के बाद से इसका सबसे बड़ा एक दिन का प्रतिशत लाभ।

अमेरिका में, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट वायदा $ 62.90 प्रति बैरल पर समाप्त हुआ, $ 8.05, या 14.7 प्रतिशत बढ़ गया – दिसंबर 2008 के बाद से सबसे बड़ा एक दिन का प्रतिशत।

भारत के मोटर वाहन अधिनियम के तहत नए जुर्माने ।

भारत के मोटर वाहन अधिनियम के तहत नए जुर्माने।

भारत में नए यातायात नियम और जुर्माना 2019: मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की 63 धाराओं के साथ, 1 सितंबर से लागू होने के बाद, केंद्र देश भर में सबसे आम यातायात उल्लंघन में से कुछ पर शिकंजा कसने के लिए तैयार है। । जबकि राज्य एक अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया में हैं, केंद्र ने उन अपराधों की एक सूची तैयार की है जिन्हें जटिल किया जा सकता है।

सरकार ने मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 के 63 प्रावधानों को अधिसूचित किया है, जिनमें विभिन्न यातायात अपराधों के लिए 1 सितंबर से दंडित किया गया है। नए नियमों में नशे में गाड़ी चलाने पर जुर्माने में 6 महीने तक की कैद और जुर्माना भी शामिल है। पहले अपराध के लिए 10,000 रुपये तक और 2 साल तक की कैद और / या दूसरे अपराध के लिए 15,000 रुपये का जुर्माना। इसके अलावा, बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाने पर जुर्माना 500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये किया जाएगा। सीटबेल्ट न पहनने का जुर्माना मौजूदा समय में 100 रुपये के मुकाबले 1,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। ओवर स्पीडिंग पेनल्टी 400 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये से 2,000 रुपये कर दी गई है

मोटर वाहन अधिनियम, 2019 नए नियम: अपराधों की सूची और संशोधित दंड

सामान्य दंड – पहला अपराध 500 रुपये तक का, दूसरा अपराध-जुर्माना 1,500 रुपये तक

सड़क विनियमन का उल्लंघन – 500 रु

बिना टिकट यात्रा करना – 500 रुपये तक का जुर्माना

अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और सूचना देने से मना करना – 2,000 रुपये तक का जुर्माना

मोटर वाहन अधिनियम: राज्यों ने यातायात उल्लंघन के लिए भारी जुर्माना लगाया है

बिना लाइसेंस के वाहनों का अनाधिकृत उपयोग – 5,000 रु

बिना लाइसेंस के ड्राइविंग – 5,000 रुपये का जुर्माना

अयोग्यता के बावजूद ड्राइविंग – 10,000 रुपये का जुर्माना

अयोग्यता के बाद एक कंडक्टर के रूप में कार्य करना – 10,000 रुपये तक जुर्माना

मोटर वाहनों और घटकों के निर्माण, रखरखाव, बिक्री और परिवर्तन से संबंधित जुर्माना – 1 वर्ष तक कारावास और / या प्रति वाहन 1,00,000 रुपये तक का जुर्माना।

दोषपूर्ण वाहन – 1 वर्ष तक कारावास और / या दोषपूर्ण ऑटोमोबाइल के लिए 1,00,000 रुपये तक का जुर्माना।

नियमों के उल्लंघन में महत्वपूर्ण सुरक्षा घटक की बिक्री – 1 वर्ष तक कारावास और / या प्रति घटक 1,00,000 रुपये का जुर्माना।

नियमों के उल्लंघन में रेट्रोफिटिंग का परिवर्तन
– छह महीने तक कारावास और / या प्रति माह 5,000 रुपये का जुर्माना

ओवरसाइज वाहन – 5,000 रु

ओवर-स्पीडिंग – एलएमवी के लिए 1,000 रुपये से 2,000 रुपये; मध्यम यात्री या माल वाहनों के लिए रु 2,000 से रु 4,000; ड्राइविंग लाइसेंस का दूसरा बाद में अपराध-परित्याग

खतरनाक ड्राइविंग के लिए जुर्माना – पहला अपराध – छह महीने से एक साल की जेल और / या जुर्माना 1,000 रुपये से 5,000 रुपये; बाद में अपराध (पहले अपराध से तीन साल के भीतर) – दो साल तक कारावास और / या 10,000 रुपये

नशे में गाड़ी चलाना – पहला अपराध- 10,000 रुपये तक का जुर्माना और / या छह महीने तक कारावास; दूसरा अपराध- 3,000 रुपये का जुर्माना और / या दो साल तक कारावास

मानसिक रूप से या शारीरिक रूप से अनफिट होने पर ड्राइविंग के लिए जुर्माना – पहला अपराध – 1,000 रुपये तक का जुर्माना; दूसरा अपराध – 2,000 रुपये तक का जुर्माना

दुर्घटना से संबंधित अपराधों के लिए दंड (धारा 132 (i), 133 और 134) – पहला अपराध – 5,000 रुपये तक का जुर्माना और / या 6 महीने का कारावास; दूसरा अपराध- 10,000 रुपये तक का जुर्माना और / या 1 साल की कैद

चंद्रयान 2: लॉन्चिंग से लेकर अब तक की पूरी कहानी ।

चंद्रयान 2: लॉन्चिंग से लेकर अब तक की पूरी कहानी ।

चंद्रयान-२ या द्वितीय चन्द्रयान, चंद्रयान-1 के बाद भारत का दूसरा चन्द्र अभियान है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने विकसित किया है। अभियान को जीएसएलवी संस्करण 3 प्रक्षेपण यान द्वारा प्रक्षेपित किया गया। इस अभियान में भारत में निर्मित एक चंद्र कक्षयान, एक रोवर एवं एक लैंडर शामिल हैं। इन सब का विकास इसरो द्वारा किया गया है।भारत ने चंद्रयान-2 को 22 जुलाई 2019 को श्रीहरिकोटा रेंज से भारतीय समयानुसार 02:43 AM सफलता पूर्वक प्रक्षेपित किया। इससे एक हफ्ते पहले कुछ तकनीकी गड़बड़ी के कारण चंद्रयान 2 को लांच के एक घंटे पहले रोकना पड़ा ।

2 सितंबर 2019

रात 3 :45 को, विक्रम लैंडर ने ऑर्बिटर की परिक्रमा छोड़ दी और चंद्रमा की ओर चल दिया।

07 सितंबर 2019

चंद्रयान-2 के अंतिम चरण में भारत के मून लैंडर विक्रम से उस समय संपर्क टूट गया था जब वह चंद्रमा की सतह की ओर बढ़ रहा था. इसरो के अनुसार, रात 1:37 बजे लैंडर की चांद पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की प्रक्रिया शुरू हो गई थी. लेकिन लगभग 2.1 किमी ऊपर संपर्क टूट गया था. इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा की डेटा की समीक्षा की जा रही है.

08 सितंबर 2019

इसरो द्वारा सूचना दी गई कि ओरबिटर द्‍वारा  लिए गए थर्मल इमेज से विक्रम लैंडर का पता चल गया है। परंतु अभी चंद्रयान-2 से संपर्क नहीं हो पाया था।

09 सितंबर 2019

इसरो द्वारा सूचना दी गई कि लैंडर क्रैश नहीं हुआ है बस चन्द्रमा की सतह पर थोड़ा ठेडा खड़ा है, परंतु अभी चंद्रयान-2 से संपर्क बनने का प्रयास जारी है ।

यूपी की जनता पर महंगी बिजली की मार ,बिजली हुई 15% तक हुई महंगी।

यूपी की जनता पर महंगी बिजली की मार ,बिजली हुई 15% तक हुई महंगी।

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) ने मंगलवार को विभिन्न उपभोक्ता श्रेणियों के लिए बिजली दरों में 12% की वृद्धि को मंजूरी दे दी.

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यूपीईआरसी द्वारा बिजली दरों में 8-12% की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। नियामक अधिभार में कटौती के बाद बिजली दरों में वास्तविक वृद्धि 3.72% से 7.72% होगी.

पहले 150 इकाइयों के लिए प्रति यूनिट per 4.90 की वर्तमान दर के खिलाफ, बिजली नियामक ने टैरिफ को लगभग 12% बढ़ाकर of 5.50 प्रति यूनिट कर दिया है। 151-300 इकाइयों, 301-500 इकाइयों और 500 से अधिक इकाइयों के लिए शुल्क वर्तमान में, 5.40 से from 6 प्रति यूनिट बढ़ाए गए हैं, क्रमशः 6.20 से from 6.50 प्रति यूनिट और 50 6.50 से from 7 प्रति यूनिट.

किसानों को भी बड़ा झटका

ग्रामीण इलाकों में फिक्स चार्ज 400 से बढ़ाकर 500 रुपये किए गए. ग्रामीण कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं को पहले से 15 फीसदी अधिक बिजली बिल भरेगा पड़ेगा, अब इन्हें 50 रुपये फिक्स चार्ज और तीन रुपये प्रति यूनिट (100 यूनिट तक) लगेगा जो अभी तक नहीं लगता था. उत्तर प्रदेश में करीब 2 करोड़ 70 लाख बिजली उपभोक्ता हैं. पावर यूटिलिटी उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने 25 फीसदी तक दाम बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था.

फिलहाल उत्तर प्रदेश में ग्रामीण उपभोक्ताओं को 100 यूनिट तक के इस्तेमाल पर 3.0 रुपये प्रति यूनिट, 100 से 150 यूनिट तक 3.50 रुपये प्रति यूनिट और 150 से 300 यूनिट के लिए 4.50 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से भुगतान करना पड़ता है.

इंडस्ट्री के लिए भी बिजली महंगी

वहीं औद्योगिक उपभोक्ताओं में पांच से 10 फीसदी दाम बढ़ाए गए हैं. इन्हें अब प्रति यूनिट 30 पैसे अधिक देने होंगे. उद्योगों को गर्मियों में सुबह और सर्दियों के मौसम में रात में बिजली उपयोग करने पर 15 फीसदी तक छूट मिलेगी.

बता दें, अगस्त महीने में पीक आवर के दौरान उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग 21,500 मेगावॉट के पार पहुंच गई थी. वहीं, बिजली की उपलब्धता 19,500 मेगावॉट के करीब थी. उत्तर प्रदेश में कुल 2 करोड़ 70 लाख बिजली उपभोक्ता हैं.

गौरतलब है कि 2017 में योगी सरकार बनने के बाद निकाय चुनाव खत्म होते ही बिजली की दरों में करीब 12.73 फीसदी का इजाफा किया गया था. उस समय भी सरकार के इस फैसले का विरोध हुआ था, और अब भी हो रहा है. बीएसपी प्रमुख मायावती ने बिजली की दरों को बढ़ाने को मंजूरी देना पूरी तरह से जनविरोधी फैसला बताया है.

जीडीपी 5 साल में सबसे निचले स्तर पर पहुंची , रुपया भी 6 महीनें में सबसे कमजोर हुआ ।

जीडीपी 5 साल में सबसे निचले स्तर पर पहुंची ,  रुपया भी 6 महीनें में सबसे कमजोर हुआ ।

वित्त वर्ष 2015 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि पांच प्रतिशत तक लुढ़क गई। प्रमुख भारतीय क्षेत्रों में मंदी के प्रभाव का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वे नौकरियों को ट्रिम करना जारी रखते हैं। हालाँकि, सरकार को स्वीकार करना बाकी है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है।

पिछले कुछ हफ्तों में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक मंदी से निपटने के लिए कई उपायों की घोषणा की। वित्त वर्ष 2015 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि 5 प्रतिशत तक धीमी होने के बाद ये कदम आए हैं – 25 तिमाहियों में या छह वर्षों में सबसे कम।

हालांकि, प्रमुख भारतीय क्षेत्रों में मंदी का सामना करना पड़ रहा है, जो चक्रीय घटना से कहीं अधिक है, पूर्व भारतीय प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह सहित कई अर्थशास्त्रियों ने कहा, जो भारत के सबसे प्रमुख अर्थशास्त्रियों में से एक है।

मनमोहन सिंह ने रविवार को एक वीडियो संबोधन में कहा कि इस संकट से अर्थव्यवस्था को बाहर निकालने के लिए सरकार को सभी “समझदार आवाजों” तक पहुंचना आवश्यक है। सिंह के बयान पर टिप्पणी करते हुए, निर्मला सीतारमण ने कहा, “उन्होंने जो कहा, उस पर मेरा कोई विचार नहीं है। उन्होंने यह कहा और मैंने इसे सुना।”

सरकार और वित्त मंत्री सीतारमण – भले ही विकास की मंदी के बारे में पर्याप्त चिंताजनक संकेत हैं – अभी तक यह स्वीकार नहीं किया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था एक परेशान अवधि से गुजर रही है।

30 अगस्त को एक संवाददाता सम्मेलन में, एक रिपोर्टर ने सीतारमण को यह बताने के लिए कहा कि वित्त मंत्रालय ने बहु-क्षेत्र के संकट, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल क्षेत्र से निपटने की योजना कैसे बनाई है। कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं थी।

1 सितंबर को, चेन्नई में एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस में, वित्त मंत्री का जवाब अलग नहीं था।

जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या आर्थिक मंदी है, तो वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार बीमार क्षेत्रों के साथ परामर्श कर रही है और स्वीकार करने से इनकार कर दिया है कि देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है।

भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पिछले स्तर से कमजोर होकर 6 महीने के निचले स्तर पर आ गया है। 70.79 के पिछले क्लोजर की तुलना में, अब तक दिन के दौरान, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 71.02 से 71.40 के बीच कारोबार करता था, जो 71.39 पर बंद हुआ था। वैश्विक जोखिम-रहित भावना को दर्शाते हुए, दुनिया भर के शेयर बाजारों में आज चीन-अमेरिका व्यापार युद्ध के बारे में आशंका के रूप में मंदी आई, हांगकांग में विरोध प्रदर्शन और अर्जेंटीना की पेसो मुद्रा में एक दुर्घटना ने निवेशकों को बांड, सोना, और येन जैसे सुरक्षित बंदरगाह पर पहुंचा दिया।

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