कार्यक्रम में वाइस बेस्ड सर्विस के लेटेस्ट इनोवेशन पर से पर्दा हटाने के लिए गूगल के सीईओ सुंदर पिचई खुद स्टेज पर पहुंचे। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने गूगल के नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले वॉयस सर्विस और गूगल के कर्मचारी(जो की यूजर की भुमिका में था) के बीच हुई बातचीत को सुना। मौजूद लोगों के मुताबिक ये सामान्य आवाज से बिलकुल अलग था। लोगों को कहना था कि ऐसा लग रहा था जैसे सच में कोई इंसान बात कर रहा हो।

इसके बाद कंपनी के सीईओ ने ‘गूगल डुप्लेक्स’ के बारे में समझाना शुरू किया। कंपनी की तरफ से दो ऑडियो कॉल सुनाए गए। इन दोनों ही ऑडियो में गूगल के नए वॉयस सर्विस से बात की गई थी, जिससे इस फीचर की क्षमता के बारे में पता चल रहा था। इस दौरान इन बातों पर भी गौर किया गया की यह फीचर और सुधार करके भविष्य में लोगों की जगह ले सकता है।

सम्मेलन में एक डेमो भी दिया गया जहां ‘गूगल डुप्लेक्स’ को एक महिला की आवाज दी गई। ‘गूगल डुप्लेक्स’ से सैलून में आने के लिए समय मांगा गया। मौजूद लोगों के मुताबिक इस बातचीत को सुन कर ऐसा लग रहा जैसे कोई दो इंसान आपस में बात कर रहे हों। बातचीत के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने सैलून में आने के लिए यूजर को टाइम भी दे दिया। इस पूरी प्रक्रिया में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं आई।

‘गूगल डुप्लेक्स’ एक ऐसी सर्विस होगी जो किसी भी काम को करने में आपकी मदद करेगी। लेकिन ऐसे में एक सवाल उठता है कि क्या गूगल की ये सर्विस आने वाले समय में लोगों की नौकरी पर बड़ा खतरा बन सकती है।