Day: January 7, 2019

हिमाचल में भारी हिमपात से जनजीवन प्रभावित

हिमाचल में भारी हिमपात से जनजीवन प्रभावित

 शिमला। राजधानी शिमला में बर्फबारी के दूसरे दिन भी धूप खिले होने के बावजूद भी दोपहर 12 बजे तक जन जीवन सामान्य नहीं हो पाया। रास्तों पर फिसलन होने के कारण लोग फिसल कर गिरते पड़ते रहे। वहीं ऊपरी शिमला के लिए कुफरी नारकंडा, ठियोग में यातायात बहाल नहीं हो पाया है। जिस कारण लोगों का शहर पहुंचना मुश्किल भरा हो गया है। राजधानी शिमला से पर्यटकों ने सुबह ही कुफरी की ओर रुख किया। लेकिन ढली से छराबड़ा तक सड़क पर बर्फ जमी होने के कारण फिसलन बनी रही और पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मजदूरों से 500 से 1000 रुपये वसूले

मजदूरों ने बर्फ में फंसी गाड़ियों को निकालने के लिए 500 रुपये से 1000 रुपये वसूले। पर्यटन स्थलों में ढाबों में भी लूट का बाजार गर्म हो गया। 15 रुपये की चाय बिकी जबकि परांठा 30 रुपये में मिला। लेकिन मजबूरी में पर्यटकों को दाम अदा करने पड़े।

शहर में नहीं मिला पानी

राजधानी शिमला में बर्फबारी के कारण पानी की पाईपें जाम हो गई। जिस कारण लोगों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ा। लोगों ने बर्फ को पिघलाकर काम चलाया।

आपात सेवाएं रात को ही हो गई बहाल

राजधानी शिमला में अस्पतालों के रास्तों से रात को ही बर्फ हटा दी गई थी जिस कारण आपात सेवाओं पर बर्फबारी का कोई खास असर देखने को नहीं मिला। लेकिन पैदल चलने वालों के लिए सोमवार को भी बर्फ मुसीबत बनी रही और लोग गिरते पड़े अपने गंतव्य तक पहुंचे।

IAS अधिकारी चंद्रकला ने पत्राचार से किया था एमए, कुछ ही वर्षों में एक करोड़ की हुई संपत्ति

IAS अधिकारी चंद्रकला ने पत्राचार से किया था एमए, कुछ ही वर्षों में एक करोड़ की हुई संपत्ति

नई दिल्‍ली । चर्चित आईएएस चंद्रकला यूं तो पिछले कुछ समय से बेहद चर्चा में रही हैं, लेकिन हाल ही में सीबीआई की छापेमारी के बाद उनकी चर्चा हर जगह आम हो गई है। चंद्रकला को इससे पहले लोगों ने वायरल हुए वीडियो में काफी देखा है। सोशल मीडिया के तहत सामने आए वीडियो में उनके काम की जमकर तारीफ भी हुई है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि उन्हें खनन घोटाले में आरोपित बनाया गया है। यहां पर ये भी जानना जरूरी है कि मेरठ और बुलंदशहर में डीएम पद पर रहते हुए वायरल हुए वीडियो के बाद उन्हें केंद्र में स्वच्छता मिशन से जोड़ दिया गया था, लेकिन वह पिछले वर्ष अगस्त से ही छुट्टी पर चल रही थीं। लेकिन उनसे जुड़ी कुछ बातें ऐसी भी हैं जिनको जानने की उत्‍सुकता लगातार लोगों के जहन में बनी हुई है। ऐसी ही कुछ बातों को हम आपके सामने ला रहे हैं।

27 सिंतबर 1979 को मौजूदा तेलंगाना के करीमनगर में जन्‍मी चंद्रकला की शुरुआती पढ़ाई लिखाई केंद्रीय विद्यालय में हुई है। चंद्रकला अनुसूचित जाति से ताल्‍लुक रखती हैं और उनकी राशि जोडियक है। उनकी मातृभाषा लंबाडी है जो बंजारा हिल के ज्‍यादातर हिस्‍से में बोली जाती है। राज्‍य के करीब सवा दो लाख लोग इसे बोलते हैं। आपको बता दें कि स्‍कूलिंग के बाद उन्‍होंने हैदराबाद के कोटी वूमेंस कॉलेज और उस्‍मानिया यूनिवर्सिटी से बाकी पढ़ाई की है। उन्‍होंने उस्‍मानिया यूनिवर्सिटी से भूगोल में स्‍नातक और इसी यूनिवर्सिटी से पत्राचार में अर्थशास्‍त्र से एमए किया है। जब वह ग्रेजुवेशन के दूसरे वर्ष में थीं तभी उनकी शादी हो गई थी। इसके बाद उन्‍होंने पत्राचार का सहारा लेकर अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाया था।

आपको यहां पर ये भी बता दें कि आईएएस बनन से पहले वह आंध्र प्रदेश पीसीएस की परीक्षा में एससी और एसटी कैटेगरी में टॉपर रही थीं। इसके बाद उन्‍हें डिप्‍टी रजिस्‍ट्रार ऑफ कॉपरेटिव सोसायटी के पद पर पहली तैनाती मिली थी। इस पद पर रहते हुए ही उन्‍होंने सिविल सर्विस का एग्‍जाम दिया था। पहली ही बार में उन्‍होंने सीएस का प्री निकाल लिया था। इसके बाद चौथी बार में जाकर उनका मेन निकल सका था। इस एग्‍जाम में उन्‍हें 409वां रैंक मिला था। आईएएस बनने के बाद उन्‍हें 2008 में मथुरा और फिर बुलंदशहर का डीएम बनाया गया था। चंद्रकला अपनी मां के काफी करीब हैं।

चंद्रकला के पिता रामागुंडम में फर्टीलाइजर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में सीनियर टेक्‍नीशियन के पद से रिटायर हो चुके हैं। उनकी मां अनपढ़ हैं। इनके अलावा उनके दो भाई हैं जिनमें से एक डीएलआरएल में टेक्निकल ऑफिसर हैं और दूसरे करीमनगर में ही बैंकर हैं। चंद्रकला को किताबें पढ़ना, बागवानी, कुकिंग और घूमना बेहद पंसद हैं। आपको यहां पर ये भी बता दें कि आईएएस बनने के करीब एक वर्ष में उनकी आय में जबरदस्‍त तेजी आई थी और यह दस लाख से बढ़कर एक करोड़ रुपये हो गई थी। 2014 में यही आय उन्‍होंने अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज कराई थी। इसकी वजह से वह सबसे पहले विवादों में घिरी थीं।

Ind vs Aus: ऐतिहासिक सीरीज़ जीत के बाद भी निराश हैं कप्तान विराट कोहली, जानिए क्यों?

Ind vs Aus: ऐतिहासिक सीरीज़ जीत के बाद भी निराश हैं कप्तान विराट कोहली, जानिए क्यों?

सिडनी । भारत ने ऑस्ट्रेलिया में 2-1 टेस्ट सीरीज़ जीतकर इतिहास रच दिया। 71 साल में ये पहला मौका है जब भारत ने कंगारुओं को उन्हीं की धरती पर टेस्ट सीरीज़ में मात दी हो, लेकिन इस ऐतिहासिक जीत के बाद भी भारतीय कप्तान विराट कोहली निराश हैं। इस बात का खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि खुद कोहली ने ही किया है।

इस वजह से निराश हैं कोहली

बारिश की वजह से पांचवें और अंतिम दिन का खेल नहीं हो पाया और अंपायरों ने लंच के बाद मैच ड्रॉ करने का फैसला किया जिससे भारत ने चार मैचों की श्रृंखला 2-1 से अपने नाम की। इस तरह से भारत बॉर्डर-गावस्कर ट्राफी बरकरार रखने में भी सफल रहा। सिडनी टेस्ट मैच के पांचवें दिन का खेल बारिश की वजह से नहीं खेला जा सका और सिडनी टेस्ट मैच को ड्रॉ घोषित कर दिया गया। सिडनी टेस्ट में भारतीय टीम मजबूत स्थिति में थी और भारत 2-1 की जगह इस सीरी़ज का अंत 3-1 से कर सकता था। कोहली के निराश होने की भी यही वजह है। कोहली ने मैच के बाद कहा कि हम सीरीज़ जीतकर बहुत खुश है, लेकिन हम ये सीरीज़ 2-1 की जगह 3-1 से जीतना चाहते थे। भारतीय कप्तान ने कहा कि बारिश और खराब रोशनी की वजह हम ऐसा नहीं कर सके और इसके लिए हम निराश है, लेकिन मौसम पर हमारा बस नहीं चलता।

कोहली ने की इन खिलाड़ियों की तारीफ

मैच के बाद कोहली ने कहा कि ये पूरी टीम की जीत है। मैं खुशनसीब हूं कि मेरे पास ऐसी टीम है जो कहीं भी, किसी भी देश में जाकर अच्छा क्रिकेट खेल सकती है। कोहली ने कहा कि पुजारा ने उम्दा प्रदर्शन किया, मयंक अग्रवाल ने भी अपने रोल को समझते हुए शानदार प्रदर्शन किया। बुमराह के बारे में कोहली ने कहा कि मेरे लिए तो वो दुनिया के बेस्ट गेंदबाज़ है और उन्होंने ये साबित भी किया है। इसके साथ ही कोहली ने हनुमा विहारी की भी तारीफ की। कोहली ने कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी मिली उन्होंने उसे बखूबी निभाया, फिर चाहे वो ओपनिंग पर आना हो या नंबर छह पर बल्लेबाज़ी करना हो।

Upper Caste Reservation: सवर्णों को 10% आरक्षण को मंजूरी, आम चुनाव से पहले मोदी सरकार का ‘मास्‍टर स्‍ट्रोक’

Upper Caste Reservation: सवर्णों को 10% आरक्षण को मंजूरी, आम चुनाव से पहले मोदी सरकार का ‘मास्‍टर स्‍ट्रोक’

नई दिल्‍ली। मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट ने सवर्ण जातियों को 10 फीसद आरक्षण के फैसले पर मुहर लगा दी है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कैबिनेट की बैठक के बाद ये जानकारी दी। एसएसटी एक्‍ट पर मोदी सरकार के फैसले के बाद सवर्ण जातियों में नाराजगी और हाल के विधानसभा चुनाव में तीन राज्‍यों में मिली हार के मद्देनजर इसे अगड़ों को अपने पाले में लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि मंगलवार को मोदी सरकार संविधान संशोधन बिल संसद में पेश कर सकती है। बता दें कि मंगलवार को ही संसद के शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन है।

राजनीतिक पंडितों ने अनुसार, मोदी सरकार के इस फैसले ने राफेल सौदे और किसानों की कर्जमाफी जैसे मुद्दों की हवा निकाल दी है। ऐसा माना जा रहा है कि इस फैसले के दूरगामी राजनीतिक परिणाम देखने को मिलेंगे। कुछ और जातियां भी लोकसभा चुनाव से पहले आरक्षण की मांग कर सकती है।

बता दें कि इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण दिया जाएगा। केंद्र सरकार का यह एक ऐतिहासिक फैसला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट की बैठक में ये फैसला लिया गया है। बता दें कि कई राज्यों में सवर्ण आरक्षण की मांग करते आ रहे हैं। हाल में तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा को मिली हार के बाद इस फैसले की अहमियत और बढ़ जाती है।

भाजपा नेता शहनवाज हुसैन ने इसे मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि गरीब स्वर्ण समुदाय लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था। पीएम मोदी ने उनकी इस मांग को मानकर समाज को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। गौरतलब है कि केंद्र और राज्यों में पहले ही अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 फीसदी और अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए 22 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है।

सरकार ऐसे देगी सवर्णों को आरक्षण
मोदी सरकार सवर्णों को आरक्षण देने के लिए जल्द ही संविधान में बदलाव करेगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में बदलाव किया जाएगा। दोनों अनुच्छेद में बदलाव कर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का रास्ता साफ हो जाएगा। बता दें कि पिछले साल जब सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट में बदलाव करने का आदेश दिया था तब देशभर में दलितों ने काफी प्रदर्शन किया था। इसको देखते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदल दिया था। ऐसा माना जा रहा था कि मोदी सरकार के इस फैसले से सवर्ण काफी नाराज हो गए, दलितों के बंद के बाद सवर्णों ने भी भारत बंद का आह्वान किया था।

Translate »