Month: December 2018

दिग्गज अभिनेता कादर ख़ान की हालत नाज़ुक, दिमाग ने किया काम करना बंद

दिग्गज अभिनेता कादर ख़ान की हालत नाज़ुक, दिमाग ने किया काम करना बंद

मुंबई। अपनी ज़बरदस्त अभिनय शैली और प्रभावशाली संवाद अदायगी के कारण याद किये जाने वाले दिग्गज अभिनेता कादर ख़ान के स्वास्थ्य को लेकर एक बुरी ख़बर आ रही है। ख़बर है कि उन्हें गंभीर रूप से बीमार होने के बाद बाइपेप वेंटीलेटर पर रखा गया है। 81 साल के कादर ख़ान प्रोग्रेसिव सुप्रान्यूक्लीयर पाल्सी डिसऑर्डर (पीएसपी ) के शिकार हो गए हैं और इसकी वजह से उनके मस्तिष्क ने काम करना बंद कर दिया है।

एक समाचार वेबसाईट से बात करते हुए कादर ख़ान के बेटे सरफराज ने जानकारी दी है कि प्रोग्रेसिव सुप्रान्यूक्लीयर पाल्सी डिसऑर्डर के चलते कादर ख़ान की दिमाग से संचालित होने वाली गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई है और डॉक्टरों ने सांस लेने में हो रही दिक्कत के कारण उन्हें बाइपेप वेंटीलेटर पर रखा गया है। वहीं इसी के साथ डॉक्टरों को उनमें निमोनिया के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं।

दिग्गज अभिनेता कादर ख़ान की हालत नाज़ुक, दिमाग ने किया काम करना बंद
दिग्गज अभिनेता कादर ख़ान की हालत नाज़ुक, दिमाग ने किया काम करना बंद

सरफराज के अनुसार डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी हेल्थ पर नज़र रखी हुई है। कादर ख़ान कई साल से अपने बेटे और बहू के साथ कनाडा में रह रहे हैं और वहीं उनका इलाज हो रहा है। लगभग एक दशक से वो ख़बरों से दूर अभिनेता कादर ख़ान का बचपन बहुत ही संघर्ष भरा रहा है और बाद के दिनों में उन्होंने बड़ी ही लग्न और समर्पण से बॉलीवुड में अपनी एक पहचान बनाई। सिर्फ़ अभिनय ही नहीं बल्कि लेखनी में भी उनका जादू खूब दिखा। एक दौर ऐसा भी रहा जब अमिताभ बच्चन के लिए भी संवाद कादर ख़ान ही लिखते थे।

Mission Gaganyaan को मंजूरी, सात दिन के लिए अंतरिक्ष में रुकेंगे तीन भारतीय

Mission Gaganyaan को मंजूरी, सात दिन के लिए अंतरिक्ष में रुकेंगे तीन भारतीय

  साल 2022 तक तीन भारतीयों को गगनयान परियोजना के तहत अंतरिक्ष भेजने की मुहिम को भारत सरकार से मंजूरी मिल गई है। तीन भारतीय वहां सात दिन बिताएंगे। यूनियन कैबिनेट ने इसके लिए बजट भी मंजूर कर दिया है।बताया जा रहा है कि इसमें 10 हजार करोड़ का खर्च आएगा।

भारत के 72 वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गगनयान परियोजना की घोषणा की थी। इस परियोजना की मदद से भारत, अंतरिक्ष में इंसान भेजने वाला चौथा देश बन जाएगा।

इस परियोजना की मुख्य बातें

  • भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष बंदरगाह से तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए अपने सबसे बड़े रॉकेट, जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क III (GSLV Mk III) को तैनात करने की तैयारी में है।
  • अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा 40 महीनों के भीतर पहला मिशन शुरू करने की उम्मीद है। नमूने के तौर पर पहले 5-7 दिनों के लिए पृथ्वी की कक्ष में दो मानव रहित और एक मानव समेत विमान भेजा जाएगा।

दिसंबर 2019 से जारी होंगे ई-पासपोर्ट, इनमें लगी चिप से एयरपोर्ट पर वेरिफिकेशन होगा आसान

विदेश मंत्रालय :ने अंतरराष्ट्रीय सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन से सहमति मिलने के बाद ई-पासपोर्ट जारी करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। ई-पासपोर्ट में लगी एक छोटी से चिप में पासपोर्ट धारक की पूरी डिटेल मौजूद होगी। लोगों को यह ई-पासपोर्ट दिसंबर 2019 तक मिलने लगेगा। पहले इसे ट्रायल बेस पर जारी किया जाएगा, बाद में कमर्शियल रूप में लोगों को मिलेगा।

नासिक में होगी प्रिंटिंग: विदेश मंत्रालय के अनुसार इसके टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ई-पासपोर्ट की मैन्‍युफैक्‍चरिंग नासिक के इंडियन सिक्‍योरिटी प्रेस (आईएसपी) में होगी। इसके लिए आईएसपी को इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (आईसीएओ) द्वारा पासपोर्ट बनाने में यूज होने वाले ऑपरेटिंग सिस्‍टम को लेने का टेंडर डालने की अनुमति दी गई है। टेंडर प्रकिया पूरी होते ही पासपोर्ट बनना शुरू हो जाएगा।

चिप में होगी धारक की बायोमैट्रिक पहचान: ई-पासपोर्ट वर्तमान पासपोर्ट की तरह ही होंगे। इसमें एक चिप लगी होगी, जिसमें पासपोर्ट अधिकारी के डिजिटल सिग्नेचर के अलावा पासपोर्ट धारक का नाम, जेंडर, डेट ऑफ बर्थ और एक डिजिटल फोटो होगी। वहीं पासपोर्ट में मौजूद चिप में धारक की उंगलियों के निशान भी शामिल होंगे।

नहीं हो सकेगी टेम्परिंग : विदेश मंत्रालय ने ई-पासपोर्ट लाने का उद्देश्य मुख्य तौर पर सुरक्षा सुविधाओं में सुधार करना बताया है। वर्तमान में जो पासपोर्ट जारी किए जा रहे हैं, ई-पासपोर्ट उससे ज्यादा सुरक्षित होंगे। हाई सिक्योरिटी चिप लगे होने के कारण इसमें किसी भी प्रकार से टेम्परिंग करना संभव नहीं होगा। साथ ही इसका एयरपोर्ट जैसी जगहों पर भौतिक सत्यापन आसानी होगा। वर्तमान में 100 से अधिक देश ई-पासपोर्ट जारी कर रहे हैं। इस सूची में पाकिस्तान का नाम भी शामिल है।

राष्ट्रीय पुरष्कार विजेता मोहन कुशवाहा का हुआ भब्य स्वागत

कोराव  | २२ दिसम्बर २०१८ को पश्चिम बंगाल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कर्राटे प्रतियोगिता में कोराव(उत्तर प्रदेश ) के मोहन कुशवाहा पुत्र श्री पति कुशवाहा ने पुरे भारत में 2nd स्थान प्राप्त कर प्रतियोगिता का उपविजेता रहे | जिसके बाद उनके पुरे परिवार में हर्ष का माहौल रहा तो मोहन कुशवाहा के कोराव पहुंचने पर क्षेत्रवासियों ने धूमधाम से उनका अभिनन्दन किया |

गर्म चाय या शरीर की लंबाई का कैसे है कैंसर से लिंक, जानें- क्‍या है मामला

गर्म चाय या शरीर की लंबाई का कैसे है कैंसर से लिंक, जानें- क्‍या है मामला

  क्‍या शरीर की लंबाई का वास्‍ता कैंसर से हो सकता है। गर्म चाय पीने से क्‍या कैंसर होने का खतरा अधिक होता है। यह बात अटपटी लग सकती है, लेकिन एक शोध में यह बात सामने आई है कि अधिक लंबाई और गर्म चाय कैंसर के बड़े कारक हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक प्रचलित धारणा यह रही है कि धूमपान या सनस्‍क्रीन कैंसर के बड़े कारक रहे हैं। वैज्ञानिकों ने इस शोध में पांच ऐसे कारणों को गिनाए हैं, जो कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं।

1- गर्म चाय से कैंसर होने का जोखिम बढ़ा 
यह धारणा रही है कि हरी चाय पीने से कैंसर का खतरा कम होता है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अधिक गर्म चाय पीने से आहार नाल में कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है। चीन में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि अधिक गर्म चाय पीने से, तंबाकू ग्रहण करने से या अधिक शराब के सेवन से कैंसर होने का खतरा पांच गुना अधिक बढ़ जाता है।

2- लंबे लोगों में कैंसर की संभावना अधिक
छोटे लोगों की तुलना में लंबे लोगों को कैंसर होने की अधिक संभावना होती है। 2018 के एक अध्ययन में पाया गया कि ऊंचाई के हर अतिरिक्त 10 सेंटीमीटर (4 इंच) के लिए, एक व्यक्ति के कैंसर का खतरा दस फीसद तक बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों ने ऊंचाई और कैंसर के बीच की कड़ी की खोज की है। शोधकर्ताओं ने कहा हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि लंबा होना किसी व्यक्ति के कैंसर के जोखिम को कैसे प्रभावित कर सकता है। यह सरल तथ्य हो सकता है कि लंबे लोगों के शरीर में अधिक कोशिकाएं होती हैं और इसलिए अधिक कोशिकाएं जो कैंसर बनने का कारक हो सकती हैं।
पहले किए गए एक अध्ययन में पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं में हर अतिरिक्त चार इंच की ऊंचाई के साथ कैंसर के खतरे में 13 फीसद की वृद्धि देखी गई। दिलचस्प बात यह है कि 2016 के एक अध्ययन में लंबे पैरों और कोलोन कैंसर के लोगों के जोखिम के बीच एक लिंक मिला। वैज्ञानिकों का दावा है कि शरीर में विकास के स्तर लिंक में एक भूमिका निभाते हैं।

3- शराब पीने से कैंसर होने का जोखिम अधिक 
शोधकर्ताओं का कहना है कि शराब पीने से कैंसर होने का जोखिम बढ़ता है। शोध से पता चलता है कि हल्की या मध्यम मात्रा में शराब पीने से लोगों में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। एक अनुमान के मुताबिक प्रतिवर्ष दुनियाभर में नए कैंसर के पांच फीसद मामले और सालाना छह फीसद कैंसर से होने वाली मौतों का सीधा संबंध शराब से है। अमेरिकन सोसायटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी के एक बयान के अनुसार शराब के अधिक सेवन से स्तन कैंसर के साथ यकृत कैंसर का जोखिम बना रहता है। इसके साथ-साथ मुंह और गले के कैंसर का खतरा भी बना रहता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि शराब कैंसर के जोखिम में कैसे योगदान देता है। अध्ययन में पाया गया कि शरीर में शराब के टूटने से एक रसायन निकल सकता है जो रक्त की स्टेम कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाता है, जिससे कैंसर हो सकता है।

4- अधिक वजन या मोटापे से कैंसर का खतरा
एक अध्ययन में पाया गया कि सामान्‍य वजन के मुकाबले जो लोग अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त थे, उन लोगों के साथ घेघा, पेट, यकृत और गुर्दे के कैंसर का खतरा लगभग दोगुना था। रिपोर्ट में कहा गया है कि जो लोग अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं उनमें हार्मोन या कोशिका वृद्धि का खतरा अधिक होता है। इससे कैंसर का जोखिम भर जाता है।

5- ग्रिल से निकला धुआँ खतरनाक
ग्रीष्‍मकाल में ग्रिल से निकलने वाला पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन कैंसर का बड़ा कारक होता है। दरअसल, जब आप  इस ग्र‍िल के समीप बैठते हैं तो आपकी त्‍वचा से इसका संपर्क होता है। आपकी त्‍वचा इसमें से निकलने वाला रसायन बड़ी मात्रा में अवशोषित करती है। एक ताजा अध्‍ययन में यह पाया गया कि यह कैंसर पैदा करने वाले एजेंट के रूप में यह काम करता है।

बिना बेहोश किये हुई ब्रेन सर्जरी, मरीज पढ़ता रहा हनुमान चालीसा

बिना बेहोश किये हुई ब्रेन सर्जरी, मरीज पढ़ता रहा हनुमान चालीसा

 जयपुर के नारायणा हॉस्पिटल में 30 साल के एक मरीज की पूरे होश में सर्जरी की गई। सर्जरी के दौरान मरीज पूरे होश में रहते हुए हनुमान चालीसा पढ़ता रहा । इस तरह का प्रदेश में यह पहला मामला सामने आया है। हॉस्पिटल की न्यूरो सर्जरी टीम ने ब्रेन ट्यूमर आॅपरेशन के दौरान यह सफलता हासिल की है । इसे अवेक ब्रेन सर्जरी के नाम से जाना जाता है ।

बार-बार मिर्गी का दौरा आने की थी समस्या

सर्जरी करने वाले चिकित्सक डॉ.के.के. बंसल ने बताया कि बीकानेर निवासी 30 साल के हुलास मल को पिछले तीन माह से बार-बार मिर्गी के दौरे आने की समस्या थी । मरीज की बायोप्सी होने पर पता लगा कि उनके दिमाग में ग्रेड-दो का ट्यूमर था। यह ट्यूमर स्पीच वाले हिस्से में था । उन्हें कुछ अन्य अस्पतालों ने सर्जरी के लिए इंकार कर दिया था, क्योंकि सर्जरी से उनके बोलने की क्षमता जा सकती थी और लकवा होने का खतरा भी था।

मरीज नारायणा हा्स्पिटल पहुंचा जहां न्यूरो सर्जन और ब्रेन ट्यूमर सर्जरी एक्सपर्ट डॉ. के.के बंसल ने सफलतापूर्वक ब्रेन ट्यूमर को मरीज के होश में रहते हुए निकाला। यह सर्जरी इसलिए भी चुनौतिपूर्ण थी, क्योंकि सर्जरी के दौरान छोटी सी गलती भी हो जाने पर मरीज बोलने की क्षमता खो सकता था । बंसल ने बताया कि सामान्य ब्रेन ट्यूमर सर्जरी में मरीज को बेहोश कर दिया जाता है जिससे सर्जरी के दौरान उसके मस्तिष्क के स्पीच एरिया पर पड़ रहे प्रभाव पर निगरानी नहीं की जा सकती। लेकिन अवेक ब्रेन सर्जरी की तकनीक से मरीज की बोलने की क्षमता को सर्जरी के दौरान बार-बार जांचा जा सकता है।

इस केस में मरीज को लगातार हनुमान चालीसा पढ़ने, सुनाने और गाने के लिए कहा जाता रहा, उसकी तुरंत प्रतिक्रिया से हमें सर्जरी को सुरक्षित रूप से अंजाम देने में सहायता मिली, क्योंकि जब भी हम गलत हिस्से को छेड़ते थे तो मरीज को स्पीच अरेस्ट हो जाता था। तीन घंटे तक चली इस सर्जरी में अत्याधुनिक माइक्रोस्कोप का इस्तेमाल किया गया और विशेष डाई इंजेक्ट किए गए जो ट्यूमर को मार्क करने में मदद करता है । सर्जरी के बाद 72 घंटे के अंदर डिस्चार्ज किया गया और अब वह सामान्य है ।

चीन / बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए स्कूलों ने शुरू की चिप वाली यूनिफॉर्म

चीन / बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए स्कूलों ने शुरू की चिप वाली यूनिफॉर्म

बीजिंग. बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए चीन के स्कूलों ने चिप वाली यूनिफॉर्म शुरू की है। 17 पौंड (करीब 1500 रुपए) की इस यूनिफॉर्म में कंधे की तरफ एक चिप लगी हुई है। यह चिप स्कूल के गेट पर लगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम से संचालित होती है।

चीन ने बनाया दुनिया का सबसे बड़ा निगरानी सिस्टम

  • चीन ने तीन साल पहले दुनिया का सबसे बड़ा निगरानी सिस्टम बनाया था। इस स्काई नेट प्रोजेक्ट में चेहरे की पहचान करने वाले 2 करोड़ कैमरे लगाए गए थे। इसके जरिए महज 3 सेकंड में 1.4 अरब लोगों को आइडेंटिफाई किया जा सकता है।
  • स्मार्ट यूनिफॉर्म को चीन की गुइझोउ गुआनयू टेक्नोलॉजी ने बनाया है। कंपनी के मैनेजर बताया कि गुइझोउ और गुआंगशी प्रांतों में इस तरह की यूनिफॉर्म शुरू की गई है। इससे छात्रों के स्कूल में प्रवेश और बाहर जाने का वक्त स्मार्ट एंट्रेंस सिस्टम अपने आप रिकॉर्ड कर सकता है।
  • एंट्रेंस सिस्टम में लगा कैमरा हर छात्र की स्कूल में एंट्री और एग्जिट का 20 सेकंड का वीडियो बनाता है। इस वीडियो को टीचर्स-पेरेंट्स के लिए बनाए ऐप पर अपलोड कर दिया जाता है। अगर कोई बच्चा बिना अनुमति लिए गेट से बाहर जाता है तो अलार्म बजने लगता है।
  • गुआनयू टेक्नोलॉजी को चिप वाली यूनिफॉर्म बनाने में 2 साल लगे थे। इसे जुलाई 2017 में लॉन्च किया गया था। स्कूल विभाग के एक अफसर के मुताबिक- यूनिफॉर्म से छात्रों पर न केवल स्कूल में बल्कि बाहर भी नजर रखी जा सकेगी।
  • चीन के कई स्कूलों में छात्रों के बर्ताव पर कैमरे से नजर रखी जा रही है। क्लास के बाहर सर्विलांस कैमरा लगाया गया है ताकि छात्रों की पढ़ाई में ध्यान और चेहरे के हावभावों का पता लगाया जा सके। इसे चीन का स्मार्ट क्लासरूम बिहेवियर मैनेजमेंट सिस्टम करार दिया जा रहा है।

यात्रियों से ज्यादा किराया न वसूलें एयरलाइंस, 50% से ज्यादा न हो कैंसिलेशन चार्ज

यात्रियों से ज्यादा किराया न वसूलें एयरलाइंस, 50% से ज्यादा न हो कैंसिलेशन चार्ज

नई दिल्ली. एयरलाइंस द्वारा ज्यादा किराया वसूलने पर संसद की स्टैंडिंग कमेटी (ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म एंड कल्चर) ने कड़ी आपत्ति जताई है। कमेटी के अध्यक्ष डेरेक ओ ब्रायन ने गुरुवार को कहा कि त्योहारों के समय कुछ एयरलाइंस 8 से 10 गुना ज्यादा किराया वसूलती हैं। उनके लिए हमारा कड़ा संदेश है कि ऐसा नहीं होने देंगे।

कैंसिलेशन पर टैक्स, फ्यूल सरचार्ज रिफंड हो: स्टैंडिंग कमेटी

  • ब्रायन ने कहा कि स्टैंडिंग कमेटी ने यह सुझाव दिया है कि कैंसिलेशन चार्ज बेसिक किराए के 50% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। टैक्स और फ्यूल सरचार्ज यात्रियों को रिफंड किया जाना चाहिए। एयरलाइंस बहुत ज्यादा चार्ज लगाती हैं।
  • स्टैंडिंग कमेटी ने कहा कि उसे इस बात की काफी जरूरत महसूस होती है कि हवाई किराए की ऊपरी सीमा तय की जानी चाहिए। कमेटी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ऐसा लगता है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हवाई किरायों में बढ़ोतरी को रोकने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए।
  • स्टैंडिंग कमेटी का कहना है कि मंत्रालय को विमानों में ज्यादा से ज्यादा सस्ती सीटें उपलब्ध करवाने और हवाई किराए को अफोर्डेबल बनाए रखने की लगातार कोशिश करनी चाहिए।
  • कमेटी ने यह भी कहा कि जब तक एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) को जीएसटी में शामिल नहीं किया जाता, तब तक ऐसा सिस्टम बनाया जा सकता है कि एटीएफ की कीमत कम होने पर उपभोक्ताओं को अपने आप फायदा मिल जाए।

बिना पेट्रोल के चलने वाला स्कूटर… 7 इंच की टच स्क्रीन वाला मीटर और रिवर्स गियर भी दिया, कहीं जाने का रास्ता भी स्कूटर ही बताएगा; 75km है माइलेज

बिना पेट्रोल के चलने वाला स्कूटर… 7 इंच की टच स्क्रीन वाला मीटर और रिवर्स गियर भी दिया, कहीं जाने का रास्ता भी स्कूटर ही बताएगा; 75km है माइलेज

 इंडिया में अब ई-स्कूटर की बड़ी रेंज है। आने वाले दिनों में कई ऑटोमोबाइल कंपनियां इलेक्ट्रिक व्हीकल लॉन्च करेंगी। इस साल बेंगलुरु की ऑटोमोबाइल स्टार्टअप कंपनी अथर एनर्जी (Ather Energy) ने भी अपना पहला ई-स्कूटर Ather S340 लॉन्च कर दिया था। इसकी ऑनरोड प्राइस (बेंगलुरु) 1,09,750 रुपए है। इसमें रजिस्‍ट्रेशन, इंश्योरेंस और स्मार्ट कार्ड शामि‍ल है। इसमें एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम सपोर्ट करने वाला टच-स्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम दिया है।

अथर एनर्जी स्कूटर के फीचर्स

> इस स्कूटर में एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम वाला इन्फोटेनमेंट सिस्टम मिलेगा। ये टच-स्क्रीन के साथ आएगा, जो पूरी तरह वाटरप्रूफ और डस्टप्रूफ होगा।
> इसमें पुश नेविगेशन, पार्किंग असिस्ट सिस्टम, वाटरप्रूफ चार्जर, मल्टीपल राइडिंग मोड्स जैसे फीचर्स भी होंगे।
> इन्फोटेनमेंट सिस्टम में आप ड्राइविंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जैसे डॉक्युमेंट अपलोड कर सकते हैं।
> स्कूटर में S340 में लिथियम-आयन बैटरी है। इस फुल चार्ज करके 75km का सफर तय कर सकते हैं।
> इसे 50 मिनट में 80% तक चार्ज किया जा सकेगा। स्कूटर की टॉप स्पीड 80kmph है।
> कंपनी का दावा है कि‍ यह 3.9 सेकंड में 0 से 40 Kmph की स्‍पीड पकड़ सकता है।
> रि‍मोट डायग्‍नोस्‍टि‍क्‍स, स्‍टैलाइट नेवि‍गेशन के साथ-साथ फ्रंट और रियर डि‍स्‍क ब्रेक और टेलि‍स्‍कॉपि‍क फ्रंट सस्‍पेंशन है।
> आसानी से बैक करने के लिए स्कूटर में रिवर्स गियर भी दिया है।

मेट्रो ने एक साल में क्यों गंवा दिए 8 करोड़ से ज्यादा यात्री, सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

मेट्रो ने एक साल में क्यों गंवा दिए 8 करोड़ से ज्यादा यात्री, सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

नई दिल्ली । मेट्रो किराये में भारी भरकम बढ़ोत्तरी की मार यात्रियों की जेब पर पड़ी है। इस वजह से मेट्रो में यात्रियों की संख्या पहले के मुकाबले कम हो गई, लेकिन कमाई के मामले में दिल्ली मेट्रो मालामाल हुई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) की वार्षिक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि किराया बढ़ाने के बाद साल भर में मेट्रो में 8,18,21,000 यात्री कम हो गए। फिर भी मेट्रो की तिजोरी में राजस्व की कमी नहीं हुई, बल्कि परिचालन से कमाई में 38.93 फीसद की भारी भरकम बढ़ोत्तरी करते हुए अपना घाटा कम करने में काफी हद तक सफल हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017-18 में दिल्ली मेट्रो को 6,211.05 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इसमें यात्री किराया के अलावा रियल ई-स्टेट, कंसल्टेंसी व बाहरी परियोजनाओं से प्राप्त राजस्व शामिल है। इस राजस्व में डीएमआरसी का कुल 4,375.34 करोड़ खर्च काटने के बाद मेट्रो 1835.71 करोड़ रुपये फायदे में रही।

यह अलग बात है कि मेट्रो परियोजनाओं के लिए जापान की एजेंसी से लिए गए लोन व अन्य सभी तरह की देनदारी भरने के बाद कुल 93.14 करोड़ का घाटा हुआ। इसके पिछले वित्त वर्ष में मेट्रो 248 करोड़ रुपये के घाटे में थी। इसकी भरपाई करने के लिए ही किराये में 100 फीसद तक की बढ़ोत्तरी की गई थी।

मेट्रो ने एक साल में क्यों गंवा दिए 8 करोड़ से ज्यादा यात्री, सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट
मेट्रो ने एक साल में क्यों गंवा दिए 8 करोड़ से ज्यादा यात्री, सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

परिचालन से 848.26 करोड़ की अधिक कमाई

डीएमआरसी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017-18 में मेट्रो को परिचालन से 3027.26 करोड़ रुपये की आमदनी हुई। इसके पिछले वित्त वर्ष में परिचालन से 2179 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। इस तरह मेट्रो परिचालन से डीएमआरसी को 848.26 करोड़ की अधिक आमदनी हुई, जबकि इससे पहले किराया कम होने के बावजूद परिचालन से राजस्व में हर साल छह से 11 फीसद तक की बढ़ोत्तरी होती थी। इसका बड़ा कारण मेट्रो में हर साल यात्रियों की संख्या बढ़ना था।

दूसरे स्रोतों से नहीं बढ़ पाई आमदनी

केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय डीएमआरसी को निर्देश दे चुका है कि मेट्रो राजस्व बढ़ाने के अन्य विकल्प तलाशे। इसके बावजूद अन्य स्रोतों से राजस्व में बढ़ोत्तरी नहीं हो पाई है, बल्कि कंसल्टेंसी शुल्क व बाहरी परियोजनाओं से कमाई कम ही हुई। बाहरी परियोजनाओं से 2331.02 करोड़ रुपये का राजस्व मिला जो पिछले वित्त वर्ष से 124.98 करोड़ रुपये कम है। यदि मेट्रो में यात्रियों की संख्या कम न हुई होती और बाहरी परियोजनाओं से राजस्व नहीं घटता तो 93.14 करोड़ रुपये के घाटे की भी भरपाई कर मेट्रो मुनाफे की पटरी पर रफ्तार भर रही होती।

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