Day: December 24, 2018

मेट्रो ने एक साल में क्यों गंवा दिए 8 करोड़ से ज्यादा यात्री, सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

मेट्रो ने एक साल में क्यों गंवा दिए 8 करोड़ से ज्यादा यात्री, सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

नई दिल्ली । मेट्रो किराये में भारी भरकम बढ़ोत्तरी की मार यात्रियों की जेब पर पड़ी है। इस वजह से मेट्रो में यात्रियों की संख्या पहले के मुकाबले कम हो गई, लेकिन कमाई के मामले में दिल्ली मेट्रो मालामाल हुई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) की वार्षिक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि किराया बढ़ाने के बाद साल भर में मेट्रो में 8,18,21,000 यात्री कम हो गए। फिर भी मेट्रो की तिजोरी में राजस्व की कमी नहीं हुई, बल्कि परिचालन से कमाई में 38.93 फीसद की भारी भरकम बढ़ोत्तरी करते हुए अपना घाटा कम करने में काफी हद तक सफल हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017-18 में दिल्ली मेट्रो को 6,211.05 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इसमें यात्री किराया के अलावा रियल ई-स्टेट, कंसल्टेंसी व बाहरी परियोजनाओं से प्राप्त राजस्व शामिल है। इस राजस्व में डीएमआरसी का कुल 4,375.34 करोड़ खर्च काटने के बाद मेट्रो 1835.71 करोड़ रुपये फायदे में रही।

यह अलग बात है कि मेट्रो परियोजनाओं के लिए जापान की एजेंसी से लिए गए लोन व अन्य सभी तरह की देनदारी भरने के बाद कुल 93.14 करोड़ का घाटा हुआ। इसके पिछले वित्त वर्ष में मेट्रो 248 करोड़ रुपये के घाटे में थी। इसकी भरपाई करने के लिए ही किराये में 100 फीसद तक की बढ़ोत्तरी की गई थी।

मेट्रो ने एक साल में क्यों गंवा दिए 8 करोड़ से ज्यादा यात्री, सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट
मेट्रो ने एक साल में क्यों गंवा दिए 8 करोड़ से ज्यादा यात्री, सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

परिचालन से 848.26 करोड़ की अधिक कमाई

डीएमआरसी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017-18 में मेट्रो को परिचालन से 3027.26 करोड़ रुपये की आमदनी हुई। इसके पिछले वित्त वर्ष में परिचालन से 2179 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। इस तरह मेट्रो परिचालन से डीएमआरसी को 848.26 करोड़ की अधिक आमदनी हुई, जबकि इससे पहले किराया कम होने के बावजूद परिचालन से राजस्व में हर साल छह से 11 फीसद तक की बढ़ोत्तरी होती थी। इसका बड़ा कारण मेट्रो में हर साल यात्रियों की संख्या बढ़ना था।

दूसरे स्रोतों से नहीं बढ़ पाई आमदनी

केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय डीएमआरसी को निर्देश दे चुका है कि मेट्रो राजस्व बढ़ाने के अन्य विकल्प तलाशे। इसके बावजूद अन्य स्रोतों से राजस्व में बढ़ोत्तरी नहीं हो पाई है, बल्कि कंसल्टेंसी शुल्क व बाहरी परियोजनाओं से कमाई कम ही हुई। बाहरी परियोजनाओं से 2331.02 करोड़ रुपये का राजस्व मिला जो पिछले वित्त वर्ष से 124.98 करोड़ रुपये कम है। यदि मेट्रो में यात्रियों की संख्या कम न हुई होती और बाहरी परियोजनाओं से राजस्व नहीं घटता तो 93.14 करोड़ रुपये के घाटे की भी भरपाई कर मेट्रो मुनाफे की पटरी पर रफ्तार भर रही होती।

डायबिटीज के मरीजों लिए खुशखबरी, अब लार से ब्लड शुगर का पता लगाएगा खास सेंसर

डायबिटीज के मरीजों लिए खुशखबरी, अब लार से ब्लड शुगर का पता लगाएगा खास सेंसर

नई दिल्ली । वैज्ञानिकों ने एक ऐसा पेपर सेंसर बनाने में सफलता हासिल की है जो लार की मदद से ब्लड शुगर का स्तर पता लगाने में सक्षम है। अभी शुगर की जांच के लिए खून की बूंद का इस्तेमाल किया जाता है। किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने इंकजेट टेक्नोलॉजी की मदद से इस सेंसर को तैयार किया है। इसके लिए कागज पर सूक्ष्म इलेक्ट्रॉड बनाए गए और उसके ऊपर विशेष एंजाइम ‘ग्लूकोज ऑक्सीडेज’ की परत लगाई गई।

डायबिटीज के मरीजों लिए खुशखबरी, अब लार से ब्लड शुगर का पता लगाएगा खास सेंसर
                           डायबिटीज के मरीजों लिए खुशखबरी, अब लार से ब्लड शुगर का पता लगाएगा खास सेंसर

वैज्ञानिकों ने बताया कि लार में उपस्थित ग्लूकोज और इस एंजाइम के बीच होने वाले बायोकेमिकल रिएक्शन से इलेक्टिक सिग्नल पैदा होता है। इसकी मदद से ब्लड शुगर के स्तर का आकलन किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने कहा कि एंजाइम को कागज पर प्रिंट करने में कई चुनौतियां हैं। इन्हें दूर करते हुए बेहतर सेंसर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रयोग के शुरुआती नतीजे उत्साहजनक रहे हैं। वैज्ञानिक अलग-अलग एंजाइम के प्रयोग की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं।

डायबिटीज एक ऐसा रोग है, जिस पर अगर नियंत्रण न किया गया, तो यह कई रोगों और स्वास्थ्य समस्याओं को बुलावा देता है। अनियंत्रित डायबिटीज के कारण कालांतर में हाई ब्लड प्रेशर, हृदय और किडनी आदि से संबंधित रोग होने का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन कुछ सजगताएं बरतकर इस मर्ज को नियंत्रित किया जा सकता है…

जरूरी है जागरूकता 
डायबिटीज वाले व्यक्ति के रक्त में ग्लूकोज की मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाती है। हम जो खाना खाते हैं, वह पेट में जाकर ऊर्जा में बदलता है। उस ऊर्जा को हम ग्लूकोज कहते हैं। खून इस ग्लूकोज को हमारे शरीर के सारे सेल्स (कोशिकाओं) तक पहुंचाता है, परंतु ग्लूकोज को हमारे शरीर में मौजूद लाखों सेल्स के अंदर पहुंचाना होता है। यह काम इंसुलिन का है। इंसुलिन हमारे शरीर में अग्नाशय (पैन्क्रियाज) में बनता है। इंसुलिन के बगैर ग्लूकोज सेल्स में प्रवेश नहीं कर सकता।

शुगर का स्तर
सामान्य स्वस्थ व्यक्ति में खाली पेट रहने पर रक्त में शुगर का स्तर 70 से 99 एम.जी. / डी.एल. रहता है। खाने के बाद यह स्तर 139 एम.जी. / डी.एल. से कम होता जाता है, पर डायबिटीज हो जाने पर यह स्तर सामान्य नहीं हो पाता। डायबिटीज के मुख्य रूप से दो प्रकार हैं- टाइप 1 और टाइप 2 ।

Ind vs Aus: वनडे सीरीज़ के लिए हुआ भारतीय टीम का एलान, धौनी की वापसी

Ind vs Aus: वनडे सीरीज़ के लिए हुआ भारतीय टीम का एलान, धौनी की वापसी

मेलबर्न। मौजूदा टेस्ट सीरीज़ के बाद भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जानी वाली वनडे सीरीज़ के टीम इंडिया का एलान हो गया है। तीन मैचों की इस वनडे सीरीज़ का 12 जनवरी से होगा। एकदिवसीय सीरीज़ का पहला मैच सिडनी में खेला जाएगा। इसी के साथ-साथ न्यूज़ीलैंड के खिलाफ खेली जानी वाली टी-20 सीरीज़ के लिए भी भारतीय खिलाड़ियों के नाम का एलान हो गया है।

बीसीसीआइ ने अपने ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट कर चुने गए खिलाड़ियों के नाम की जानकारी दी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज़ के लिए महेंद्र सिंह धौनी की वापसी हुई है वहीं रिषभ पंत को वनडे टीम से बाहर कर दिया गया है। धौनी को वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी-20 सीरीज के दौरान आराम दिया गया था। चयन समिति प्रमुख एमएसके प्रसाद पहले ही साफ कर चुके है कि धौनी विश्व कप 2019 के लिए विकेटकीपर के रूप में पहली पसंद हैं।

वनडे सीरीज़ में इन खिलाड़ियों को मिली जगह

रोहित शर्मा, लोकेश राहुल, शिखर धवन, अंबाती रायुडू, दिनेश कार्तिक, केदार जाधव, एम एस धौनी, हार्दिक पांड्या, कुलदीप यादव, युजवेंद्र चहल, रवींद्र जडेजा, भुवनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह, खलील अहमद और मोहम्मद शमी।

न्यूज़ीलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज़ के लिए टीम

रोहित शर्मा, लोकेश राहुल, शिखर धवन, अंबाती रायुडू, दिनेश कार्तिक, केदार जाधव, एम एस धौनी, हार्दिक पांड्या, रिषभ पंत, क्रुणाल पांड्या, कुलदीप यादव, युजवेंद्र चहल, भुवनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह और खलील अहमद।

टिकट चेकरों को 87 साल बाद वापस मिलेगा सम्मान, अंग्रेजो ने छीन लिया था हक

टिकट चेकरों को 87 साल बाद वापस मिलेगा सम्मान, अंग्रेजो ने छीन लिया था हक

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के टिकट चेकरों को उनको खोया सम्मान वापस मिल सकता है। दरअसल स्वतंत्रता सेनानियों की मदद के लिए 87 साल पहले अंग्रेजो ने देश के टिकट चेकरों से विशेष दर्जा छीन लिया था। अगर सरकार द्वारा गठित एक समिति इसे मंजूरी देती है तो इन्हें जल्द ही रेलवे की ‘रनिंग स्टाफ’ की पोजिशन वापस मिल सकती है।

लोको ड्राइवर, सहायक लोको  ड्राइवर, गार्ड, ब्रेकमैन और अन्य जो ट्रेन की आवाजाही में मदद करते हैं, ये सभी रनिंग स्टाफ श्रेणी में आते हैं और इन्हें उच्च-वातानुकूलित विश्रामगृहों में ठहरने जैसे कई लाभ मिलते हैं।

एक अधिकारी ने कहा कि टिकट चेकर्स भी इस विशेष दर्जे में शामिल थे, लेकिन 1931 में स्वतंत्रता सेनानियों को ट्रेनों में सीट मुहैया कराने और उनकी खेपों को एक गंतव्य से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में मदद करने के आरोप में इसे छीन लिया गया था।

हाल ही में रेलवे मंत्रालय ने अगले तीन महीनों के भीतर इस मुद्दे पर फैसला करने के लिए तीन सदस्यों की एक समिति बनाई है। ‘रनिंग स्टाफ’ के तौर पर ड्राइवरों और गार्डों को बहुत सारे लाभ मिलते हैं। टिकट चेकर कर्मचारियों से उनकी तनख्वाह 30 प्रतिशत अधिक होती है, वे केवल 10 घंटे की शिफ्ट में काम करते हैं और रेलगाड़ी के देरी से चलने पर उन्हें रिलिवर भी मिलते हैं। ‘रनिंग स्टाफ़’ को बढ़िया दैनिक भत्ता भी मिलता है, जबकि  टिकट चेकर कर्मचारियों को दैनिक भत्ते के रूप में 400 से 500 रुपये ही मिलते हैं।

अधिकारी ने बताया कि यही नहीं ‘रनिंग स्टाफ’ की तुलना में उनकी पेंशन भी कम से कम 5,000 रुपये से 6,000 रुपये कम है। रनिंग स्टाफ को आराम करने के लिए वातानुकूलित रनिंग रूम, रसोइया और यहां तक ​​कि कॉलमैन भी मिलते हैं।

उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद 1962 में टिकट चेकर्स को पाकिस्तान द्वारा रनिंग स्टाफ का दर्जा दिया गया और 2004 में बांग्लादेश ने भी उन्हें कई लाभ दिया। इस साल सितंबर में, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सहित लगभग 100 सांसदों ने रेलवे के रनिंग स्टाफ में इन्हें शामिल करने के लिए रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखे हैं।

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