Day: December 1, 2018

संस्कृत एवं पालि भाषा का अन्तःसम्बन्ध विषय पर परिचर्चा एवं प्रमाण-पत्र वितरण समारोह सम्पन्न।

दिल्ली संस्कृत अकादमी, झण्डेवालान,करोलबाग, नई दिल्ली-05 द्वारा आयोजित तीन महीने का पालि भाषा अध्ययन प्रशिक्षण का दीक्षांत समारोह अकादमी के सभागार में आज संपन्न हुआ। इस कोर्स का प्रारंभ 9 सितंबर 2018 को हुआ था, जो लगातार तीन महीने चला और आज इसका समापन हुआ। ज्ञातव्य हो यह कोर्स इस अकादमी में दिल्ली सरकार द्वारा पहली बार शुरू किया गया है जो आगे भी चलता रहेगा। इस दीक्षांत समारोह में छात्रों सहित दिल्ली संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ जीतराम भट्ट, कोर्स के प्रशिक्षक प्रोफेसर उपेंद्रराव चौडूरि और अकादमी के अन्य कार्यकर्तागण उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ जीतराम भट्ट ने किया उन्होंने कहा “पालि भाषा और संस्कृत भाषा के अंतरसंबंध के बारे में कहा और इन दोनों भाषाओं के विकास के लिए कार्य करने पर बल दिया। उन्होंने छात्रों को स्वाध्याय करने के लिए कहा और कहा जो उन्होंने इस अकादमी में सिखा है अब वो उसे अन्य लोगों को भी बतायें जिससे वो अपने गुरु का ऋण उतार सकें। कार्यक्रम के मुख्यवक्ता प्रोफेसर उपेंद्रराव ने पालि भाषा को बहुत ही प्राचीन बताया और कहा यह प्राचीन भारत को समझने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण माध्यम है। आज पालि विलुप्त हो गया है, पालि के विद्वानों की कमी है। एक समय हमारे यहाँ पालि सिखने लोग आते थे, आज हमें दूसरे देश जाना पड़ता है। पालि बहुत ही समृद्ध भाषा है और इसका प्रभाव आज भी भारत के उत्तर और दक्षिण में दिखलाई पड़ता है अपितु भारत ही नहीं यूरोप के देशों पर भी इसका प्रभाव है। उन्होंने बहुत से पालि शब्दों की व्याख्या की। उन्होंने कहा वो पालि भाषा के विकास के लिए हमेशा कार्य करते रहेंगे। कार्यक्रम में छात्रों ने भी अपने-अपने अनुभव शेयर किये जिसमें ओमवीर सिंह, प्रेम लता, प्रदीप शर्मा, रामरतन कुशवाहा, राम अवध वर्मा आदि सम्मिलित थे। अन्त में सभी को प्रमाण-पत्र वितरित कर कार्यक्रम का समापन हुआ।ib hello

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